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प्रखरता से ‘चाणक्य’ ने पलटे इतिहास के पृष्ठ

Sun, 15 Oct 2017 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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पथरचट्टी रामलीला मैदान के मंच पर शनिवार को प्राचीन भारत के अप्रतिम हस्ताक्षर ‘चाणक्य’ की कथा-व्यथा दोहराई गई। जानेमाने कलाकार मनोज जोशी की परिकल्पना और निर्देशन में चाणक्य के जीवन में घटित ऐतिहासिक घटनाएं मंच पर भाषा में पुनर्परिभाषित हुईं तो हर कोई कथ्य और सशक्त अभिनय का कायल हुआ।
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भावप्रवण अभिनय और अनूठी संवाद शैली सहित आकर्षक मंच सज्जा, कालक्रम पर आधिरत वस्त्र विन्यास के अतिरिक्त अनुरूप ध्वनि एवं प्रकाश संयोजन ने प्रस्तुति को प्रभावपूर्ण बनाया। चाणक्य की भूमिका में मनोज जोशी ने अपने प्रभावी अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा। चारु जोशी सहित अन्य कलाकारों ने भी अपनी-अपनी भूमिका से न्याय किया। दिव्य प्रेम सेवा मिशन की ओर से मिशन के सेवा प्रकल्पों को सक्षम, व्यवस्थित, स्वावलंबी एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनाने के उद्देश्य से मनोज जोशी की ओर से ‘चाणक्य’ की यह 1127वीं प्रस्तुति थी।

इससे पहले मिशन अध्यक्ष आशीष गौतम ने मिशन के सेवा प्रकल्पों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, कथाव्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज आदि ने मिशन के सेवाकार्यों की सराहना की। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने मिशन की सदस्यता ली। उद्घाटन में किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, महामंडलेश्वर भी शामिल थीं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जुगुल किशोर तिवारी ने विषय प्रवर्तन और डॉ.ब्रजेश मिश्र ने संचालन किया। कार्यक्रम में हाईकोर्ट के अनेक जज, मिशन मिशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और अपर महाधिवक्ता महेश चंद्र चतुर्वेदी, श्रीकृष्ण पहल, अविनाश शर्मा, प्रदीप शाही, विनीत संकल्प, धीरेंद्र सिंह, अजमत सिद्दकी आदि के अतिरिक्त अनेक विशिष्टजन मौजूद थे।
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‘चाणक्य’ की प्रस्तुति से पूर्व मिशन के प्रमुख सदस्य और तिरंगा अगरबत्ती के निदेशक नरेंद्र शर्मा ने मिशन और मंचन के बारे में जानकारी दी। कहा, मिशन का उद्देश्य कुष्ठ रोगियों की चिकित्सा सेवा के साथ उनके स्वस्थ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा एवं संस्कार के लिए नि:शुल्क कार्यक्रम चलाना है। इसके लिए किसी तरह की सरकारी मदद नहीं ली जाती है।
कहा, मिशन के दैनिक खर्च के लिए सेवा प्रकल्पों के तहत चाणक्य के मंचन जैसे कला और संस्कृति से जुड़े आयोजन भी होते हैं। इसी क्रम में बीते दिनों हेमामालिनी जी का कार्यक्रम हुआ था। हमारी कोशिश हो कि सेवा के ऐसे कार्य हों जिनसे दूसरों के मन में भी भीतर से सेवा का भाव जगे।
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