उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बार एसोसिएशन के चुनाव अधिकारी को हटाए जाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। तर्क दिया गया कि चुनाव अधिकारी को हटाना राजस्व परिषद बार एसोसिएशन कार्यकारिणी का सही कदम नहीं है। इस पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने मामले में सुनवाई से इन्कार कर दिया और मामले की सुनवाई किसी दूसरी खंडपीठ को नामित करने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के पास भेज दिया। सुनीता शर्मा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
याची के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने याचिका में कहा है कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के आदेश से राजस्व परिषद बार एसोसिएशन का चुनाव होना था। चुनाव अधिकारी मनीष ने चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया था। 19 दिसंबर को मतदान होना था, लेकिन बार कार्यकारिणी ने मंगलवार को अचानक बैठक कर चुनाव अधिकारी मनीष को हटा दिया और नए चुनाव अधिकारी की नियुक्ति कर दी।
बताया गया है कि वर्तमान कार्यकारिणी जो कि 20 वर्षों से लगातार बनी हुई है, वह चुनाव नहीं चाहती है। इसके साथ ही चुनाव अधिकारी ने मॉडल बाईलॉज से चुनाव कराने को कहा था। जिसमें वर्तमान कार्यकारिणी लगातार दूसरे वर्ष चुनाव में भागीदार नहीं कर सकती है। इसी वजह से ऐसा किया गया है। यह बार काउंसिल के अध्यक्ष के आदेश का भी उल्लंघन है। बताया कि चुनाव अधिकारी मनीष का कहना है कि उन्हें राजस्व परिषद बार एसोसिएशन कार्यकारिणी का सहयोग नहीं मिला। उन्होंने चुनाव कराने की तैयारी पूरी कर ली थी।