देश के पहले पीएम नेहरू ने यहीं से जीता था चुनाव
फूलपुर के सियासी मिजाज को समझने के लिए हमें इतिहास के पन्नों को भी पलटना होगा। शुरुआती तीन लोकसभा चुनाव में यहां से देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू निर्वाचित हुए। उनके निधन के बाद विजय लक्ष्मी पंडित भी यहां से दो बार निर्वाचित हुई। यहां कांग्रेस का तिलिस्म पहली बार 1969 के चुनाव में जनेश्वर मिश्र ने तोड़ा। तब वह सोशलिस्ट पार्टी से यहां चुनाव जीते। पूर्व पीएम वीपी सिंह भी यहां से एक बार सांसद रह चुके हैं। 1977 में कमला बहुगुणा के चुनाव जीतने के बाद यहां अब तक 12 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें से नौ बार कुर्मी प्रत्याशी ही चुनाव जीतने में कामयाब हुआ।
इस बार मौजूदा सांसद केशरी देवी पटेल का टिकट कटने के बाद यहां फिजा बदल गई है। वोटरों की नाराजगी से यहां हर रोज सियासी समीकरण बन बिगड़ रहे हैं। सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी जहां दोनों दलों के परंपरागत वोट हासिल करने का दम भर रहे हैं तो वहीं भाजपा प्रत्याशी मोदी मैजिक और अपने राजनीतिक अनुभव को आधार मानकर प्रचार में जुटे हुए हैं। कुल पांच विधानसभा सीट वाले फूलपुर लोकसभा में वर्तमान समय चार सीटें भाजपा तो एक सीट सपा के पास है। प्रयागराज शहर का एक तिहाई क्षेत्र फूलपुर लोकसभा में ही है।
मिली जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं फूलपुर के वोटर
झूंसी स्थित अनवार मार्केट में सुबह दस बजे के आसपास एक चाय की दुकान पर चुनावी चर्चा में मशगूल स्थानीय निवासी आरपी मिश्रा ने कहा कि इस बार भी हम प्रत्याशी नहीं, बल्कि पीएम मोदी के नाम पर वोट देंगे। यहां उनकी हां में हां स्थानीय निवासी सत्येंद्र पटेल ने भी मिलाई। इसी बीच उनकी बात काटते हुए अधिवक्ता आरके यादव ने कहा कि भाईसाहब महंगाई देख रहे हो, हर चीज का दाम आसमान पर है।
फूलपुर में इफ्को प्लांट से तकरीबन 200 मीटर आगे कृष्णा रेस्टोरेंट के बाहर बैठे दीनानाथ यादव ने कहा कि बीते दस वर्ष में उनके विधायक प्रवीण पटेल ने कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया। वहीं चाय की चुस्कियां लगा रहे अधिवक्ता एजाज ने भी उनकी हां में हां मिलाई। कहा कि देखिए बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। वहां मौजूद शारदा यादव और जियाउद्दीन ने कहा कि इस बार का चुनाव पीएम मोदी के लिए काफी मुश्किल है। देखते हैं चार जून को क्या होता है।
दोपहर का समय था। हम सहसों के पास रामनगर स्थित एक चाय की दुकान पर पहुंचे। वहां प्रमोद त्रिपाठी आजाद कुछ लोगों के साथ चुनावी चर्चा में मशगूल दिखे। वहां चर्चा का विषय था कि इस बार दलित वोटर किसके साथ हैं। शुभम यादव, पुष्पेंद्र पांडेय ने कहा कि दलित इस बार सपा को वोट देने के मूड में है। यहां विद्याधर पांडेय ने कहा कि वह देशहित देख रहे हैं। इसलिए उनका वोट राष्ट्रवाद के नाम होगा। इस बीच प्रमोद ने सभी की बात काटते हुए कहा कि भइया इस बार तो ब्राह्मण भी काफी नाराज चल रहे हैं। यहां चुनावी चकल्लस जारी रहा और हम आगे बढ़ गए।
-मऊआइमा बाजार में लाल जी ढाबा के सामने कुछ मुस्लिम युवा भी चुनावी चर्चा में मशगूल दिखे। यहां मो. आवेश आलम ने कहा कि इस बार गठबंधन भारी दिख रहा है। उनकी हां में हां मिलाते हुए सरवर मलिक ने कहा कि समस्या ये हैं कि गठबंधन अपना पीएम किसे बनाएगा। वहां खड़े एक अन्य युवक मो. आवेश आलम ने कहा कि राहुल गांधी ही पीएम के लिए ठीक कैंडीडेट दिखाई दे रहे हैं।
- शाम चार बजे के आसपास लालता स्वीट हाउस अल्लापुर में कुछ युवा चुनावी चर्चा में मशगूल दिखे। यहां रवि उपाध्याय, प्रेम शंकर श्रीवास्तव, मयंक यादव ने कहा कि तीसरी बार मोदी को पीएम बनने से कोई नहीं रोक सकता। उनकी बात काटते हुए व्यापारी रोहित कुमार ने कहा कि व्यापार ठप है। ऑनलाइन कारोबार ने हमारी कमर तोड़ कर रख दी है। यहां चुनावी चकल्लस जारी रहा और हम आगे बढ़ गए।
प्रमुख मुद्दे
सहसों में राम जानकी मंदिर पास मिले आरके पटेल ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में छुट्टा जानवर बड़ी समस्या है। यह बात सही है कि अयोध्या में राम मंदिर बन गया है, लेकिन महंगाई पर सरकार ध्यान दें।
मऊआइमा बाजार में मो. जावेद ने कहा कि पावरलूम के लिए यह कस्बा हब था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। कताई मिल भी कई वर्ष से बंद है। अगर यह मिल फिर से चालू हो जाए तो लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सोरांव तहसील के पास हुई मुलाकात में शिक्षक पीके तिवारी ने कहा कि मोदी और योगी के आने से कानून व्यवस्था तो सुधरी है लेकिन बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। नौजवान समझ ही नहीं पा रहे कि वह क्या करें।
इफ्को के पास शंभू यादव ने कहा कि गंगापार में इफ्को के अलावा कोई अन्य उद्योग ही नहीं है। इफ्को में भी काम करने वाले अधिकांश बाहरी लोग है। यहां स्थानीय लोगों को रोजगार ही नहीं मिलता।
थरवई बाजार के रामचंद्र सरोज ने कहा कि गंगापार में उद्योग न होने से युवा गुजरात, महाराष्ट्र की ओर पलायन कर रहे हैं। आखिर ऐसा कब तक चलेगा।