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सोशल मीडिया पर प्रतियोगियों के निशाने पर यूपीपीएससी अध्यक्ष

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Chairman on the target of competitors on social media
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सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों के निशाने पर आयोग अध्यक्ष
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इंटरव्यू के तीन दिन बाद पीसीएस जे का रिजल्ट देने से मचा घमासान
अभ्यर्थियों ने रिजल्ट को बताया मजाक, पूछा कि जांच का क्या हुआ
प्रयागराज। इंटरव्यू के तीन दिन बाद ही पीसीएस जे का अंतिम चयन परिणाम जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के नए अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार सोशल मीडिया में अभ्यर्थियों के निशाने पर हैं। पीसीएस जे परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के मद्देनजर अभ्यर्थियों की ओर से फेसबुक पर यूपीपीएससी और नए अध्यक्ष पर तमाम टिप्पणियां की गईं हैं।
सोशल मीडिया पर किसी अभ्यर्थी ने रिजल्ट को एक खराब मजाक बताया है तो किसी ने आयोग के अध्यक्ष से पूछा है कि परीक्षा की जांच का क्या हुआ? एक अभ्यर्थी ने लिखा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने पीसीएस जे के अभ्यर्थियों को विश्वास दिलाया था कि फाइनल रिजल्ट बिना जांच के नहीं जारी करेंगे। वहीं, एक अन्य अभ्यर्थी ने लिखा है, ‘69000 शिक्षक भर्ती की दशा?’ एवं वादा पीसीएस जे की जांच? फिर भी हम उम्मीद करते हैं अध्यक्ष से कि शायद आगे न्याय मिले, क्योंकि हम प्रतियोगियों के पास धैर्य और संयम के सिवाय कुछ है भी नहीं। एक प्रतियोगी छात्र ने पीसीएस जे में चयनित कुछ अभ्यर्थियों के रोल नंबर की लिस्ट को पोस्ट करते हुए लिखा है कि पीसीएस जे अभ्यर्थियों को इन अनुक्रमांक पर आपत्ति थी और उनकी आपत्ति परिणाम आने पर सही साबित हुई। इन अनुक्रमांक में 17 का चयन अंतिम रूप से हो गया है।
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सोशल मीडिया पर कुछ अन्य टिप्पणियां
- ‘यह सब जुमले बाजी है। न ही कोई जांच होनी है और न ही ऐक्शन लिया जाना है और न ही भ्रष्टाचार के खिलाफ।’
- ‘मतलब ड्राइवर चेंज हुआ और ट्रेन पुन: स्पीड पकड़ रही है। सब फ्रूटफुल ही होगा। माननीय भी अमाननीय भी।
- ‘पीसीएस जे का परिणाम अभ्यर्थियों के नाम, पते के साथ जारी होना चाहिए ताकि जनता जान सके कि माननीयों के बच्चे कितने होनहार हैं।’
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अयोग ने जांच के बाद ही जारी किया रिजल्ट: सचिव
- उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि अभ्यर्थियों ने आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार से मुलाकात के दौरान जिन बिंदुओं पर शिकायत दर्ज कराई थी, आयोग ने उन सभी बिंदुओं की जांच कराई और कोई भी तथ्य सही नहीं पाया गया। इसके अलावा प्रतियोगी छात्रों ने इन्हीं बिंदुओं पर उच्च न्यायालय में भी दो अलग-अलग चायिकाएं दाखिल की थी और न्यायालय ने दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था। आयोग ने अपने स्तर से जांच कराने और न्यायालय के आदेश का अवलोकन करने के बाद ही पीसीएस जे-2018 का अंतिम चयन परिणाम जारी किया।
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