इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रतियोगियों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए शासन की ओर से बनाई गई गाइडलाइन पर विरोध प्रकट किया है। उन्होंने नियमों के उल्लंघन के साथ पारदर्शिता न होने का भी आरोप लगाया है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से हाईकोर्ट में इसे निरस्त कर नई गाइडलाइन बनाने की मांग की जाएगी। इसके लिए सप्लीमेंट्री दाखिल की गई है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर शासन की ओर से आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए गाइडलाइन बनाई गई है। इसके अनुसार मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह और नियुक्ति एवं कार्मिक की तीन सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी विशिष्ट व्यक्तियों में से किसी को अध्यक्ष और सदस्यों के लिए नामित करेगी। उनका हर स्तर पर वेरिफिकेशन कराना होगा। कमेटी पूरी छानबीन के बाद अध्यक्ष के लिए पांच तथा सदस्य के एक पद के सापेक्ष तीन लोगों का नाम मुख्यमंत्री को भेजेगी। मुख्यमंत्री की संस्तुति के बाद चयनित अध्यक्ष और सदस्यों का नाम राज्यपाल को भेजा जाएगा। राज्यपाल की संस्तुति के बाद उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया जाएगा।
इसके विपरीत प्रतियोगी इस गाइडलाइन के विरोध में हैं।
उनका कहना है कि तीन आईएएस अफसरों की कमेटी बनाई गई है। वे खुद के विवेक के अनुसार किसी का भी नाम चुन सकते हैं। जबकि, इसके लिए पब्लिक नोटिस जारी किया जाना चाहिए। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि नियुक्ति में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री को दे दिया गया है। जबकि, राज्यपाल के पास यह अधिकार होना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि चरित्र सत्यापन के लिए भी निश्चित मापदंड नहीं अपनाया गया है। अवनीश ने बताया कि समिति के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में सप्लीमेंट्री फाइल कर इन सभी बातों से अवगत कराया है। इसे निरस्त कर नई गाइडलाइन बनाने की मांग की जाएगी।