सेरेब्रल पाल्सी के प्रति अब लोगों में जागरूकता बढ़ी है। ऐसे में बच्चों का इलाज समय पर और बेहतर दिशा में हो रहा है। त्रिशला फाउंडेशन के डॉ. जितेंद्र जैन बताते हैं कि पहले लोग पांच से छह साल में बच्चों का इलाज कराने आते थे। अब पांच से छह माह में बच्चों का उपचार कराने पहुंच रहे हैं।
सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित 60 फीसदी से अधिक बच्चों की बौद्धिक क्षमता सामान्य लोगों के बराबर होती है। सही दिशा मिलने पर ऐसे बच्चे उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर सकते हैं। डॉ. जैन ने बताया कि पिछले चार सालों से एक बच्चे का चयन एमबीबीएस में हो रहा है।
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गोरखपुर की यशी के पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी मगर जन्म से डिटोनिक सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित बच्ची के उपचार की चाहत उनके दिल में थी। इसमें सहयोग डॉ. जितेंद्र जैन ने किया। पांच साल की उम्र से बच्ची का इलाज शुरू हुआ। यशी के शरीर के एक तरफ का भाग काम नहीं करता था। पढ़ाई में तेज होने के कारण यह समस्या उनके इरादों के आगे बौनी हो गई। वर्ष 2023 में कोलकाता नेशनल मेडिकल कॉलेज में उनका चयन हुआ। यशी के एमबीबीएस बैच के साथियों और डॉ. जितेंद्र ने पढ़ाई के खर्च की जिम्मेदारी उठाई। यशी अब एमबीबीएस के चौथे साल में हैं।
यह है सेरेब्रल पाल्सी
सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क से संबंधित विकारों का एक समूह है, जो व्यक्ति की गति, मांसपेशियों के नियंत्रण, समन्वय और शारीरिक मुद्रा को प्रभावित करता है। यह बच्चों में होने वाली सबसे आमतौर विकलांगताओं में से एक है।
यह हैं लक्षण
1. समय पर गर्दन न संभालना, बैठना, घिसट कर चलना व खड़ा होना न सीखना।
2. मांसपेशियों का अत्यधिक सख्त या अकड़ा हुआ होना (स्पास्टिसिटी) या बहुत अधिक ढीला महसूस होना।
3. हाथों और पैरों के उपयोग में असंतुलन, एक हाथ का दूसरे की तुलना में अधिक उपयोग करना व झटकेदार मूवमेंट होना।
4. लड़खड़ाकर चलना, पंजों के बल चलना या पैरों का आपस में टकराना।
5. बोलने में कठिनाई, अत्यधिक लार टपकना, निगलने व चूसने में परेशानी और देखने-सुनने में दिक्कत।
सेरेब्रल पाल्सी के लक्षणों को समय रहते पहचानना जरूरी है। लोगों में जागरूकता बढ़ी है। इसकी वजह से बच्चों को समय रहते उपचार के लिए सेंटर लाया जा रहा है। ऐसे में अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
- डॉ. जितेंद्र जैन, निदेशक, त्रिशला फाउंडेशन