यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह ने प्रोफेसर अजय कुमार सिंह तथा 25 अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा, शिवेंदु ओझा, बीएचयू के अधिवक्ता हेम प्रताप सिंह, भारत सरकार के अधिवक्ता अर्विंद सिंह तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अधिवक्ता रिजवान अली अख्तर ने पक्ष रखा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर के जीपीएफ वन पेंशन पर तीन माह में निर्णय करने तथा देय राशि अगले तीन माह में भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि आदेश का पालन करने में सरकार विफल रही तो वास्तविक भुगतान तिथि तक पूरी राशि पर आठ फीसदी ब्याज देना होगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह ने प्रोफेसर अजय कुमार सिंह तथा 25 अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा, शिवेंदु ओझा, बीएचयू के अधिवक्ता हेम प्रताप सिंह, भारत सरकार के अधिवक्ता अर्विंद सिंह तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अधिवक्ता रिजवान अली अख्तर ने पक्ष रखा।
याची अधिवक्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले, जिसकी सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की है, का सहारा लिया। कहा, याचियों को जीपीएफ पेंशन पाने का हक है। विश्वविद्यालय ने भी 29 सितंबर 22 को केंद्र सरकार को अंतिम निर्णय लेने के लिए भेजा है। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्णय लेने का निर्देश दिया है।