अपर निजी सचिव भर्ती परीक्षा-2010 की जांच शुरू करने के बाद सीबीआई को इसमें धांधली के कई सुबूत मिले हैं। ट्रिपल-सी के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के कुछ मामले सामने आए हैं। मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है और किसी भी दिन बड़ी कार्रवाई हो सकती है। परीक्षा में हुई धांधली में आयोग और शासन स्तर के कुछ अफसरों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
सीबीआई ने जनवरी-2018 से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की जांच शुरू की थी। तकनीकी कारणों से एपीएस-2010 की परीक्षा सीबीआई जांच के दायरे में नहीं आ रही थी लेकिन, शिकायतों के आधार पर सीबीआई ने जब प्रारंभिक जांच की तो उसे परीक्षा में गड़बड़ियां मिलीं। सीबीआई ने इस परीक्षा की जांच के लिए शासन से विशेष अनुमति मांगी और सितंबर में सीबाआई को जांच के लिए अनुमति दे दी गई। इसके बाद सीबीआई ने आधिकारिक रूप से परीक्षा की जांच शुरू कर दी। कई चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज खंगाले गए तो शिकायतें सही सबित होने लगीं। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई को शिकायत मिली थी कि परीक्षा में शामिल तकरीबन 18 अभ्यर्थियों ने ट्रिपल-सी के फर्जी अभिलेख लगाए थे। परीक्षा के बाद बैक डेट पर उनसे बाद में ट्रिपल-सी के अभिलेख फिर से जमा कराए गए और एपीएस के पद पर उनका चयन कर लिया गया।
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने जब अभिलेखों की जांच की तो पाया कि इनमें से तीन अभ्यर्थियों को ज्वाइन कर दिया गया है। इसके अलावा चार अन्य चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने की तैयारी थी लेकिन सीबीआई का हस्तक्षेप बढ़ने पर चारों अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र रोक दिए गए। सूत्रों का कहना है कि जिन तीन अभ्यर्थियों को ज्वाइन कराया गया, उनकी ज्वाइनिंग के लिए विभागीय मंत्री से अनुमोदन नहीं लिया गया। सचिवालय प्रशासन विभाग के कुछ अफसरों ने तीनों को कार्यभार ग्रहण करा दिया। संदिग्ध चयनितों को ज्वाइन कराने वाले शासन स्तर के अफसर भी अब सीबीआई के रडार पर हैं। साथ ही इसमें आयोग के कुछ अफसरों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।