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UPPSC : सीबीआई ने दर्ज किए हैं दस हजार अभ्यर्थियों के बयान, अभिलेखों के अभाव में निष्कर्ष तक पहुंचना मुश्किल

Fri, 20 Jun 2025 05:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के दौरान सीबीआई की ओर से अब तक 10 हजार अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन जरूरी अभिलेखों के अभाव में सीबीआई के लिए किसी निष्कर्ष तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
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यूपीपीएससी, UPPSC - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के दौरान सीबीआई की ओर से अब तक 10 हजार अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन जरूरी अभिलेखों के अभाव में सीबीआई के लिए किसी निष्कर्ष तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद की ओर मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि सीबीआई को आयोग से 15 जुलाई 2023, 21 अप्रैल 2024 व एक जनवरी 2025 को तीन पत्र मिले, जिसके अनुसार आंशिक अभिलेख/अपेक्षित दस्तावेज उपलब्ध कराने की सूचना दी गई, लेकिन आयोग मामलों के पूरे रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में विफल रहा। ऐसे में अपेक्षित दस्तावेज के अभाव में जांच पूरी करना और निकट भविष्य में किसी भी तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है।

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दरअसल, सीबीआई और आयोग के बीच यह खींचतान सात साल पुरानी है। सीबीआई की टीम जनवरी 2018 में जांच के लिए जब पहली बार आयोग परिसर में दाखिल हुई थी तो टीम के सदस्यों का आयोग में विरोध का सामना करना पड़ा था। जांच रोकने के लिए आयोग ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने आयोग को जांच में सहयोग करने का निर्देश दे दिया था। इसके विरुद्ध आयोग सुप्रीम कोर्ट गया था और वहां से भी जांच में सहयोग के लिए कहा गया था।

न्यायालय में भी लंबित हैं मामले

सीबीआई निदेशक ने पत्र में कहा है कि परीक्षाओं से संबंधित कई मामले इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भी लंबित हैं। सीबीआई को न्यायालयों के निर्देशों के तहत समय-समय पर ऐसे मामलों में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होती है। ऐसी रिपोर्टों में प्रगति की कमी और जांच की धीमी गति के कारण उच्च न्यायालय से सीबीआई के साथ-साथ राज्य सरकार के प्रति प्रतिकूल विचार आने की संभावना रहती है।

चार साल से ठप पड़ी है जांच

उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद 31 जुलाई 2017 को सरकार ने लोक सेवा आयोग की अप्रैल-2012 से मार्च-2017 तक की अवधि में घोषित परिणामों की सीबीआई जांच के दिए थे। शुरुआत में जांच काफी तेजी से बढ़ी। पीसीएस परीक्षा-2015 व एपीएस परीक्षा-2010 के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वर्ष 2021 से जांच प्रक्रिया लगभग ठप है।
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एपीएस परीक्षा की जांच के लिए मिली थी विशेष अनुमति

सीबीआई को जिस कार्यकाल की परीक्षाओं की जांच करनी थी, उसमें एपीएस परीक्षा-2010 शामिल नहीं थी, लेकिन तमाम शिकायतें आने के बाद सीबीआई को जब प्रारंभिक जांच में कुछ गड़बड़ियां मिलीं तो परीक्षा की अलग से जांच के लिए प्रदेश सरकार से विशेष अनुमति ली गई। इस मामले में सीबीआई ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन कार्रवाई जहां की तहां अटकी रह गई।

अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय और मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने यूपीपीएससी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते कहा है कि आयोग पर ऐसा कौन सा दबाव है कि चार साल बाद भी संदिग्ध लोक सेवकों के खिलाफ जांच की अनुमति नहीं दी जा सकी है। अवनीश व प्रशांत ने शासन एवं आयोग के अफसरों के बीच गठजोड़ कर आरोप लगाते हुए मांग की है कि मुख्यमंत्री इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करें, ताकि सीबीआई के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराने वाले अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
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