फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court : जन्म से मिली जाति अंतरजातीय विवाह या धर्मांतरण के बाद भी नहीं बदलती

Fri, 13 Feb 2026 05:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जन्म से मिली जाति अंतरजातीय विवाह या धर्मांतरण के बाद भी नहीं बदलती। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ ने एससी/एसटी समुदाय की महिला की ओर से याची पर दर्ज कराए गए मुकदमे को रद्द करने इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जन्म से मिली जाति अंतरजातीय विवाह या धर्मांतरण के बाद भी नहीं बदलती। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ ने एससी/एसटी समुदाय की महिला की ओर से याची पर दर्ज कराए गए मुकदमे को रद्द करने इन्कार कर दिया।

विज्ञापन


अलीगढ़ के खैर थाने में एक महिला ने दिनेश और आठ अन्य के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। ट्रायल कोर्ट ने 27 जुलाई 2022 को आरोपियों को समन जारी किया था। याचियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि शिकायतकर्ता महिला मूलरूप से पश्चिम बंगाल की है। वहां वह एसी/एसटी समुदाय की है। उसने अब जाट समुदाय के व्यक्ति से विवाह कर लिया है। इसलिए वह अब एससी/एसटी समुदाय की नहीं रही। शादी के बाद महिला अपने पति की जाति की हो जाती है। अतः उस पर एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं होगा।

कोट ने कहा कि विवाह से किसी व्यक्ति की मूल जाति नहीं बदलती है। किसी अन्य जाति में शादी करने मात्र से महिला जन्म से मिली जाति के आधार पर मिलने वाले संरक्षण या पहचान को नहीं खोती है। अदालत ने यह भी कहा कि क्रॉस केस होने मात्र से शिकायत को खारिज नहीं किया जा सकता। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें