कमेटी ने शुरू की जांच
डीएम की ओर से गठित कमेटी के सदस्य एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया और सीएमओ डॉ. प्रभाकर राय ने जांच शुरू कर दी। दोनों अफसरों ने बच्ची के परिजनों तथा आरोप में घिरे यूनाइटेड मेडिसिटी हॉस्पिटल प्रशासन से पूछताछ की। सीएमओ का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की मौत सेप्टीसीमिया से हुई है। उन्होंने बताया कि उसकी आंत में इंफेक्शन था, जिसका ऑपरेशन किया गया लेकिन पस लगातार रिसता रहा। इसकी वजह से दोबारा ऑपरेशन किया गया, लेकिन रिसाव नहीं रुका।
इसकी वजह से पेट में टांके नहीं लगाए गए। बच्ची की तबीयत बिगडने पर चिल्ड्रेन में भर्ती कराया गया था लेकिन परिजन बिना बताए बच्ची को लेते गए। मौत कहां हुई इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। वहीं बच्ची के चाचा दिलीप मिश्रा का कहना था कि चिल्ड्रेन हास्पिटल के डॉक्टर ने जवाब दे दिया था। इसके बाद वे लोग बच्ची को एक अन्य निजी अस्पताल ले गए। वहां भी जवाब दे दिया गया। इसके बाद वे लोग बच्ची को लेकर यूनाइटेड अस्पताल ले गए, लेकिन वहां भर्ती नहीं किया गया और बच्ची की मौत हो गई।
ईर्ष्यावश तथ्यों को तोड़-मरोडक़र किया जा रहा प्रस्तुत
यूनाइटेड मेडिसिटी हॉस्पिटल प्रशासन ने बच्ची के इलाज में किसी तरह की लापरवाही के आरोप को सिरे से खारिज किया है। पत्रकार वार्ता में निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि कुछ लोग ईर्ष्या के कारण तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। शुक्रवार को कुछ अराजक तत्वों ने अस्पताल परिसर में पत्थर भी फेंके। उनका कहना है कि मुकेश मिश्रा बच्ची को लेकर 15 फरवरी को आए थे। बच्ची की आंत में इंफेक्शन था।
स्थिति संभलने पर पिता मुकेश की स्वीकृति के बाद 24 फरवरी को ऑपरेशन किया गया। पित्त से रिसाव की वजह से दो मार्च को दोबारा ऑपरेशन किया गया। इसकी भी स्वीकृति पिता से ली गई थी। इसके बाद आगे के इलाज के लिए स्वरूपरानी अस्पताल रेफर कर दिया गया और तीन मार्च को ही चिल्ड्रेन अस्पताल में बच्ची को भर्ती कर लिया गया था। निदेशक का यह भी कहना है कि भ्रम फैलाया जा रहा है कि अस्पताल प्रशासन ने मुकेश से दो लाख रुपये लिए हैं। जबकि, मरीज के परिजन ने अस्पताल को मात्र 6370 रुपये ही दिए हैं। शेष राशि हॉस्पिटल के ट्रस्ट ने वहन की है।