देश के 111वें व्यक्ति हैं सतुआ बाबा जिनके पाश है पोर्शे
सतुआ बाबा का काशी में है मुख्य आश्रम
काशी के मणिकर्णिका घाट पर सतुआ बाबा का स्थायी आश्रम है। इस पीठ की स्थापना साल 1803 में हुई थी। ये पीठ गुजरात के रहने वाले संत जेठा पटेल ने की थी। जेठा पटेल संत बन गए थे और काशी आकर उन्होंने जिस आश्रम की स्थापना की, उस आश्रम के मुखिया को सतुआ बाबा कहते हैं। इस आश्रम में बटुकों को वैदिक शिक्षा दी जाती है। आज उसी पीठ के मुखिया संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा हैं।
11 साल में छोड़ा घर, 19 साल में बन गए महामंडलेश्वर
संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के साधारण ब्राह्मण परिवार से आते हैं। मात्र 11 साल की उम्र में परिवार छोड़ वो काशी आ गए। काशी में उनका जुड़ाव सतुआ बाबा से हो गया। वैष्णव संप्रदाय के निर्मोही अखाड़े से जुड़े इस पीठ के मुखिया ने संतोष दास की प्रतिभा देख उन्हें अपना उत्तराधिकारी बना दिया। संतोष दास मात्र 19 साल की उम्र में महामंडलेश्वर बन गए। ये अब तक के इतिहास में सबसे कम उम्र में दी गई महामंडलेश्वर की उपाधि थी।
साढ़े तीन लाख की बुलेट से चलते हैं