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अदालतों में असलहे ले जाना प्रतिबंधित

Tue, 07 Apr 2015 11:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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जिला अदालतों में लगातार बढ़ रही आपराधिक वारदातों के मद्देनजर सरकार ने अब अदालतों में असलहे लेकर जाने पर रोक लगा दी है। न्यायालय परिसर में अब किसी भी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र प्रतिबंधित रहेगा। अदालत और जजों की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों के अलावा बंदियोें को पेशी पर ले जाने वाले पुलिसकर्मी इस दायरे से बाहर होंगे। जिला अदालतों की सुरक्षा और वकीलों के हड़ताल के मुद्दे की सुनवाई कर रही सात जजों की पीठ के समक्ष मंगलवार को प्रमुख सचिव गृह ने यह जानकारी दी। सुरक्षा के अलावा वृहद पीठ के समक्ष वकीलों की हड़ताल, अदालतों में प्रवेश के लिए बायोमैट्रिक कार्ड जारी करने, सीसीटीवी कैमरा लगाने, सजायाफ्ता लोगों को वकालत का अधिकार देने जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वृहदपीठ में मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस राकेश तिवारी, जस्टिस राजेश कुमार, जस्टिस वीके शुक्ला, जस्टिस अरुण टंडन, तरुण अग्रवाल और जस्टिस दिलीप गुप्ता ने सुनवाई की।
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पिछली तारीख पर कोर्ट ने 75 अधिवक्ता संघों सहित बार कौंसिल ऑफ इंडिया और यूपी, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, अवध बार एसोसिएशन को भी नोटिस जारी किया था। इलाहाबाद जिला अधिवक्ता संघ के अलावा प्रदेश का दूसरा कोई संघ आज की सुनवाई में सामने नहीं आया। कोर्ट ने सभी संघों को जिला जजों के मार्फत नोटिस की सूचना सुनिश्चित करने के लिए कहा है। याचिका पर अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। इस दिन अधिवक्ता संघों और कौंसिल को अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत करने को कहा गया है।

मंगलवार को मुख्य रूप से सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई। कोर्ट का मत था कि सभी जिला अदालतों में वकीलों, कर्मचारियों, अधिवक्ता क्लर्क (मुंशी) और परिसर में रहने वाले दुकानदारों को बायोमैट्रिक कार्ड जारी किया जाए। वादकारियों के प्रवेश हेतु भी पास की व्यवस्था हो। जिला जजों को अधिकार दिया जाएगा कि वह किसी अवांछित व्यक्ति का प्रवेश रोक सकें। बार का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट वीवी उपाध्याय का कहना था कि बायोमैट्रिक कार्ड की योजना पर वकील सहमत हैं मगर वादकारियों को प्रवेश से रोकने पर अधिवक्ताओं का नुकसान होगा। न्यायालय में प्रवेश के रास्ते सीमित किए जाएं और उन पर विधिवत चेकिंग हो।
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अदालतों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के सवाल पर बार सहमत थी मगर उसकी मांग थी कि न्यायकक्षों में भी कैमरे लगाए जाएं ताकि न्यायपालिका की कार्यवाही की भी रिकार्डिंग हो। अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र और अवध बार के सचिव रमेश तिवारी ने भी न्यायकक्ष में कैमरे लगाने की मांग उठाई। कोर्ट ने इस पर विचार का आश्वासन दिया है। अपर महाधिवक्ता सीबी यादव ने कहा कि तमाम जिलों में न्यायालय और कलेक्ट्रेट एक ही परिसर में हैं। बाउंड्रीवाल भी टूटी है इससे सुरक्षा और असलहों पर प्रतिबंध की योजना लागू करने में समस्या होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि न्यायालय का जो भी आदेश होगा सरकार उसका पालन करेगी।

वृहद पीठ ने सजा याफ्ता और रेग्युलर प्रैक्टिस नहीं कर रहे वकीलों को चिह्नित करने के सवाल पर बार एकमत नहीं दिखी। वरिष्ठ अधिवक्ता रविकिरन जैन ने कहा कि वकील के पास नियमित रूप से वकालत न करने के कई कारण हो सकते हैं उसे इस आधार पर रोका नहीं जा सकता है। कचहरी के वकीलों का एडवोकेट रोल बनाया जा सकता है। वकील को प्रैक्टिस से नहीं रोका जा सकता। वकीलों को एक ही बार एसोसिएशन में वोट देने पर भी चर्चा हुई।
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