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जरूरी हो तो दुबारा गवाही से नहीं कर सकते इंकार : हाईकोर्ट 

Thu, 05 Nov 2020 09:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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court - फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि न्याय हित में जरूरी हो तो किसी गवाह को दोबारा बुलाकर गवाही लेने से इंकार नहीं किया जा सकता है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 का उद्देश्य न्याय दिलाना है। इस धारा के तहत सत्र न्यायालय को किसी भी गवाह को दोबारा सवाल के जवाब को बुलाने का विवेकाधिकार दिया गया है।
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आरोपी को न्याय देने मे विफलता से बचने के लिए यह उपबंध किया गया है। ऐसे में विचारण न्यायालय मनमाने तरीके से गवाह को दुबारा बुलाने की अर्जी निरस्त नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने अपर सत्र न्यायाधीश हापुड़ को नाबालिग बच्ची के दुष्कर्म व हत्या के घायल चश्मदीद गवाह मृतका के भाई नितिन को वीडियो क्लिप पर सवाल पूछने के लिए बुलाने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने आरोपी अमरजीत उर्फ कलुआ की याचिका पर दिया है। 

कोर्ट ने अपर सत्र न्यायाधीश के गवाह को दुबारा बुलाने से इंकार करने के 14 फरवरी 20 के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। पांच सितंबर 18 को 12 साल की लड़की व उसका 10 साल का भाई नितिन घर में थे। पिता खेत में चारा काटने गए थे। मां व एक बेटा दिल्ली गए थे। डेढ़ बजे दोपहर को याची अंकुर तेली व सोनू उर्फ पौवा और उसके दो साथियों ने घर में घुसकर नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म किया और हत्या कर दी। भाई नितिन को चाकू मार कर घायल कर दिया। आरोपी जेल में हैं।
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पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दी है। कोर्ट ट्रायल में गवाही और प्रति परीक्षा होने के बाद आरोपी ने चश्मदीद गवाह घायल भाई नितिन की अस्पताल में इलाज के दौरान की वायरल हुई मोबाइल वीडियो क्लिप पर सवाल पूछने के लिए उसे दुबारा बुलाने की अर्जी दी। जिसे ट्रायल में देरी की टैक्टिस करार देते हुए कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याची का कहना है कि वीडियो क्लिप में वास्तविक अपराधियों का नाम नितिन ने लिया है। न्याय के लिए चश्मदीद गवाह के सवालों के जवाब के लिए दुबारा बुलाना जरूरी है। कोर्ट ने याचिका मंजूर कर ली है।
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