इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अविभाजित पैतृक संपत्ति के खास हिस्से पर कब्जा सौपने के संबंध में मेन्टीनेन्स एण्ड वेल्फेयर ऑफ पैरेन्ट एण्ड सीनियर सिटिजन एक्ट के तहत समादेश जारी नहीं किया जा सकता और अधिकारियों को भी संपत्ति का बंटवारा करने का अधिकार नहीं है।बंटवारे के लिए सिविल वाद दायर कर किया जा सकता है । कोई ने जिलाधिकारी प्रयागराज को याची की अर्जी तय करने का निर्देश देने से इंकार कर दिया है।कोर्ट ने याची को बंटवारा वाद दायर कर विवाद निपटाने का विकल्प सुझाया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की खंडपीठ ने करछना प्रयागराज निवासी जय प्रकाश तिवारी की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि उसके पैतृक आवास में वह दो भाइयों के साथ रह रहा है। मकान का बंटवारा नहीं किया गया हैऔर भाई उसके हिस्से का अतिक्रमण कर निर्माण करा रहे हैं।विवाद पर पुलिस ने धारा 107/116के तहत चालान कार्यवाही भी की है।थानाध्यक्ष उसके कब्जे में जबरन हस्तक्षेप कर रहे है।वह सीनियर सिटिजन है।जिलाधिकारी उसकी अर्जी तय नहीं कर रहे है।जिसपर यह याचिका दायर की गई थी।