माघ मेला के बजट में इस बार कटौती के आसार हैं। इतना ही नहीं संस्थाओं की संख्या भी सीमित करने की तैयारी है। हालांकि, प्रमुख सचिव नगर विकास दीपक कुमार ने बुधवार को समीक्षा बैठक और निरीक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि सुविधाओं और सुरक्षा में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कोविड संक्रमण के मद्देनजर भी समुचित इंतजाम के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव ने सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे। एक-दो दिनों में उस पर मुख्य सचिव के अनुमोदन के बाद मुख्यमंत्री की अनुमति मिलने की उम्मीद है।
समीक्षा बैठक में मेला के प्रारूप पर कोई निर्णय तो नहीं हुआ लेकिन कई प्रस्ताओं पर सहमति जताते हुए प्रमुख सचिव ने तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। मेला में साधु-संतों के अलावा तीर्थ पुरोहितों को जमीन तथा अन्य सुविधाएं दिए जाने की बात कही जा रही है। इनमें आने वाले कल्पावासियों को भी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। कोविड संक्रमण को देखते हुए अन्य संस्थाओं को जमीन नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री के निर्देश पर लिया जाएगा। बैठक में पांटुन पुल की संख्या को लेकर भी गतिरोध रहा। मेला में पांच पांटुन पुल का प्रस्ताव है लेकिन प्रशासनिक अफसर मात्र दो पुल के पक्ष में है। इसके विपरीत लोक निर्माण विभाग के अफसरों का कहना है कि दो पुल तो आने और जाने के लिए हो जाएंगे।
वहीं एक पुल आकस्मिक सेवाओं के लिए होता है। इसे लेकर प्रमुख सचिव ने पांटून पुल के लिए निर्धारित स्थलों का निरीक्षण भी किया। पिछले वर्ष मेला के आयोजन में करीब 78 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। संबंधित विभागों ने इसे ध्यान में रखकर प्रस्ताव तैयार किए हैं लेकिन प्रमुख सचिव ने इसमें कटौती की बात कही। इसी के अनुसार नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। बैठक और निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने बिजली, पानी, चिकित्सा, सफाई, चकरप्लेट, शौचालय, जेटी, घाट, पार्किंग आदि सुविधाओं की जानकारी ली और इसमें किसी तरह की कटौती नहीं किए जाने की बात की। उनका मेले की सुरक्षा और सैनिटाइजेशन पर विशेष बल रहा। मंडलायुक्त आर.रमेश कुमार, आईजी कविंद्र प्रताप सिंह ने भी सुझाव दिए। बैठक में डीएम भानु चंद्र गोस्वामी, डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, नगर आयुक्त रवि रंजन आदि मौजूद रहे।