इलाहाबाद। सावन के पहले ही सोमवार को गहरेबाजी पुलिस और पब्लिक की नोकझोंक का शिकार हो गई। यमुना बैंक रोड पर जहां गहरेबाजी की शुरुआत मेेेें ही एक घोड़े की नीली बत्ती गाड़ी से टक्कर के बाद पब्लिक से नोकझोंक हो गई और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद कार्यक्रम को विराम मिल गया,वहीं अरैल मोड़ रोड पर गहरेबाजी के समापन पर पहुंची पुलिस की अनुमति के मुद्दे पर आयोजकों से कहासुनी हुई।
दोनों ही जगहों पर गहरेबाजों ने प्रशासन और पुलिस पर गहरेबाजी के लिए अनुकूल व्यवस्था न किए जाने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई। कहा, सब कुछ जानते हुए भी प्रशासन एक परंपरा को जीवंत रखने में कोई सहयोग नहीं करता है जिसके कारण अप्रिय घटनाओं की संभावना बनी रहती है।
वैसे अरैल रोड पर हुई गहरेबाजी प्रतियोगिता में ‘आंधी’ ‘तूफान’ का जलवा दिखा। अखिल भारतीय गहरेबाजी एवं पशु उत्थान कल्याण समिति की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में प्रदेश के कई जिलों समेत दिल्ली के दो दर्जन से अधिक गहरेबाज शामिल हुए। समिति के अध्यक्ष विष्णु महाराज की देखरेख में नए यमुना पुल के नीचे से प्रतियोगिता शुरू हुई।
शुरूआत से ही ‘आंधी’ और तूफान ने बढ़त बना ली। विष्णु महाराज के घोड़े राकेट और बबलू के घोड़े चेतक ने अपनी रफ्तार से लोगों को लुभाया। पूरे रास्ते लोग उत्साह बढ़ाते रहे। अरैल घाट पहुंचकर प्रतियोगिता समाप्त हुई। व्यवस्थापक शेर अली के मुताबिक परिणाम सावन के अंतिम सोमवार को घोषित किया जाएगा।
भूकंप बना आकर्षण का केंद्र
सीएमपी डिग्री कालेज से मेडिकल चौराहे तक होने वाली परंपरागत गहरेबाजी में भूकंप आकर्षण का केंद्र बना रहा। इक्का दौड़ के लिए सी एम पी डिग्री कालेज से मेडिकल चौराहे तक के रास्ते पर लोगों का हुजूम था। लाल जी यादव का घोड़ा भूकंप की कदमचाल ने लोगों को लुभाया। बदरे आलम, पप्पू बेली, गुड्डू चकिया, लल्लू पहलवान, बप्पी, गोलू, काकू आदि के घोड़ों ने बेहतर प्रदर्शन किया लेकिन भूकंप की रफ्तार के आगे टिक नहीं सके। मेडिकल चौराहे पर पहुंच कर दौड़ खत्म हुई।