CAA brought in to distract from core problems
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सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में मंसूर अली पार्क में महिलाओं का धरना लगातार 42वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान महिलाआें तथा अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार और आरएसएस पर जमरप हमला बोला। कहा, महंगाई, बेरोजगारी, अपराध जैसे मुद्दों से भटकाने के लिए ही सरकार जानबूझकर सीएए, एनआरसी, एनपीआर जैसे कानून ला रही है। बाद में प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।
इस दौरान चंदा बेगम, ज़ीशान रहमानी, सारा अहमद, शैलेश पासवान, हमजा हसन, मोनिस, अनीस आदि ने दो टूक कहा कि भाजपा नाकामी छिपाने के लिए मजहब का खेल रच रही है। एक के बाद एक नफरत फैलाने वाले कई फैसले लिए गए। सरकार को लगने लगा था कि कहीं से कोई विरोध नहीं होगा लेकिन महिलाओं ने हुक्मरानों को झुकने के लिए मजबूर किया है।
सीएए और एनआरसी को लेकर सरकार के नुमाइंदों के सुर बदलने लगे हैं। अब इसमें संशोधन की बात की जा रही है, जो बड़ी जीत है। दिशा छात्र संगठन, आइसा से जुड़े युवाओं ने गीतों के माध्यम से जोश भरा। सीएए के विरोध में अलग-अलग मोहल्लों से जुलूस निकालकर महिलाएं मंसूर अली पार्क पहुंचीं और धरने में शामिल हो गईं। तकरीरों का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। धरनास्थल पर सैयद मुहम्मद अस्करी, कांग्रेस के इरशादउल्ला, शोएब अंसारी, मोहम्मद साहब, अतीक इब्राहिम आदि ने विचार रखे।