फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएए : हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिपोर्ट मांगी

Mon, 27 Jan 2020 10:06 PM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस उत्पीड़न की शिकायतों पर सरकार ने क्या कार्रवाई की है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि विभिन्न समूहों और संगठनों द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर पुलिस वालों और प्रशासनिक अधिकारियों पर कितने मुकदमे दर्ज किए गए। यदि नहीं किए गए तो क्यों।
विज्ञापन


कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पूरा ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कितने लोग मरे या घायल हुए। पुलिस के खिलाफ  कितनी शिकायतें दर्ज की गईं। घायलों के इलाज के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मीडिया में प्रकाशित हो रही खबरों की सत्यता की जांच की गई या नहीं।

प्रदर्शनकारियों पर दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में हाईकोर्ट में पीयूसीएल, पीएफआई, अधिवक्ता अजय कुमार सहित दर्जनों लोगों ने याचिकाएं दाखिल की हैं। सभी याचिकाओं में दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने सरकार से पूछा है कि मृत लोगों के घर वालों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी गई या नहीं। कोर्ट ने राज्य सरकार को 17 फरवरी तक पूरे ब्योरे के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन


याचिका पर केंद्र सरकार व राज्य सरकार की तरफ  से हलफनामा दाखिल किया गया। राज्य सरकार का पक्ष अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और केंद्र सरकार का अधिवक्ता सभाजीत सिंह ने पक्ष रखा। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफ ए नकवी, सुप्रीमकोर्ट के वकील महमूद प्राचा सहित कई अन्य वकीलों ने बहस की।

याचिका में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ  शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है। घटना की जांच हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश या एसआईटी  से कराने और पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों का इलाज कराने की मांग की गई है। याची पक्ष के वकीलों  का कहना है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का उत्पीड़न किया है। जिसकी रिपोर्ट विदेशी मीडिया में छपने से भारत की छवि को नुकसान हुआ है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, मेरठ व अन्य नगरों में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ  शिकायतों की विवेचना कर कार्रवाई की जाए।

केंद्र सरकार की तरफ  से कहा गया कि केंद्रीय सुरक्षा बल राज्य सरकार के बुलाने पर भेजे गए। कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए उचित कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार का कहना था कि विरोध प्रदर्शन में हुई हिंसा में भारी संख्या में पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस पर फायरिंग की गई। प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और आगजनी कर सरकारी तथा व्यक्तिगत संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसकी विवेचना की जा रही है। व्यक्तिगत रूप से किसी ने पुलिस के खिलाफ शिकायत नहीं की है। इस पर याची पक्ष के वकीलों का कहना था कि लोग डर के मारे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें