सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो शहर के बाहरी हिस्से में जल्द बाईपास का निर्माण शुरू हो जाएगा। बाईपास बनने से शहर की सड़कों पर वाहनों का बोझ कम होगा। कानपुर से वाराणसी, मध्य प्रदेश की ओर जाने वाली गाड़ियां बिना शहर में प्रवेश किए निकल जाएंगी। इससे जाम की समस्या से भी बड़ी राहत मिलेगी। तकरीबन 43 किलोमीटर लंबे बाईपास और इसके लिए गंगा-यमुना पर एक-एक पुल समेत चार रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज बनाने की योजना की डिजाइन पर इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी समेत अन्य विभागों ने तैयारी शुरू कर दी है।
इलाहाबाद में बाईपास की मांग लंबे समय से की जा रही है। कोखराज से हंडिया पास बनने से कुछ राहत मिली है, लेकिन कानपुर की ओर से आकर रीवा, मिर्जापुर की ओर जाने वाले भारी वाहन अब भी शहर के बीच होकर नए यमुना के रास्ते निकलते हैं। इसके अलावा वाराणसी की ओर से आकर रीवा, मिर्जापुर की तरफ जाने वाले वाहन भी नए यमुना पुल से गुजरते हैं। इसकी वजह से बैरहना में जबरदस्त जाम लगता है। कुंभ व माघ मेला स्नान पर्व पर संगम क्षेत्र में आने वाली भीड़ के कारण स्थिति ज्यादा खराब होती है। ऐसे में बाईपास की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, ताकि भारी वाहन शहर के बाहर से निकल जाएं।
बाईपास के लिए 42.966 किलोमीटर लंबा रूट निर्धारित किया गया है। जीटी रोड पर मनौरी रेलवे लाइन पार कर दक्षिणी दिशा से होकर यमुना नदी को पार कर मिर्जापुर रोड होकर झूंसी के आगे सहसों रोड तक बनाया जाएगा। यहां से बाईपास कोखराज-हंडिया हाईवे से मिल जाएगा। बाईपास के लिए यमुना एवं गंगा पर एक-एक पुल बनेगा। हालांकि नैनी को झूंसी से जोड़ने के लिए गंगा पर पुल स्वीकृत हो चुका है। इसके साथ इलाहाबाद-कानपुर रूट, इलाहाबाद-मिर्जापुर रूट, इलाहाबाद-वाराणसी रूट एवं इलाहाबाद-जौनपुर रूट पर चार रेल ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे।
एडीए उपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि बाईपास, पुल और आरओबी के लिए कुल 1288.98 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। बाईपास मार्ग चार लेन का बनाया जाएगा, जो भविष्य में आठ लेन का किया जाएगा। मुख्य मार्ग के दोनों तरफ दो-दो लेन की साइड लेन भी होगी। बताया कि विकास प्राधिकरण की महायोजना में बाईपास मानचित्र प्रदर्शित है। जल्द ही सर्वे कर डिजाइन तैयार कराके शासन को भेजा जाएगा।