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मंदी ने होटल, रेस्टोरेंट सेक्टर को भी दिया करोड़ाां का झटका

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Business sector
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पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 30 से 40 फीसदी कारोबार गिरा
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कुंभ में हुई थी अच्छी कमाई, अब बुकिंग भी रह गई एक चौथाई
प्रयागराज। वर्ष 2019 की शुरुआत में 50 दिन के कुंभ मेले के आयोजन में जहां एक ओर शहर के कारोबारियों की बांछें खिल गई तो वहीं दूसरी ओर होटल इंडस्ट्री में पहली बार बूम देखने को मिला। मेले में आने वाले देश एवं विदेश के हजारों सैलानी होटलों में ही रुके। इस दौरान करोड़ों का कारोबार भी हुआ, लेकिन कुंभ के बाद आई मंदी की आहट ने कारोबारियों के चेहरों की रौनक गायब कर दी। मंदी के चलते आलम यह है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों का 30 से 40 फीसदी कारोबार गिर गया है। आने वाले दिनों में भी व्यापारियों को और ज्यादा कारोबार गिरने की उम्मीद है।
बीते कुछ माह के दौरान आई मंदी का असर शहर के होटल, रेस्टोरेंट पर भी पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष तकरीबन 30 फीसदी यानी की 15 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। शहर के बड़े होटलों में होने वाली बुकिंग पर भी इसका खासा असर पड़ा है। इस बीच कुछ होटल संचालकों ने अपने रेट भी गिरा दिए हैं। यही स्थिति रेस्टोरेंट की भी हो गई है। प्रयागराज होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सरदार जोगिंदर का कहना है कि शहर में 150 के आसपास छोटे-बड़े होटल है। इनका वार्षिक कारोबार 50 करोड़ रुपये के आसपास है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जुलाई 2018 की तुलना में इस जुलाई तक 30 फीसदी कारोबार कम हुआ है। होटल कारोबारी योगेश गोयल भी कारोबार में आई गिरावट से खासे निराश हैं। कहा कि अब कुंभ के बाद से होटल में होेने वाली बुकिंग पर ब्रेक लग गया है। होटलों में सबसे ज्यादा बुकिंग मार्केटिंग या सेल्स से जुड़े आयोजनों की होती है लेकिन इस बार यह बुकिंग भी घटकर एक चौथाई हो गई है। मार्केट में कैश न होने से ज्यादा दिक्कत आई है।
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ऑनलाइन फूड ने भी बढ़ा दी परेशानी
होटल कारोबारियों का कहना है कि शहर में ऑन लाइन फूड का चलन काफी बढ़ गया है। लोग अपने मनपसंद के होटल, रेस्टोरेंट जाने की बजाय घर पर ही खाना मंगवाना पसंद कर रहे हैं। इसके चलते बिक्री पर असर पड़ा है। रेस्टोरेंट आदि केे संचालन पर आने वाले खर्च निकलने में परेशानी बढ़ी है। स्टेटमैन रेस्टोरेंट के प्रोपराइटर राशिद सगीर ने बताया कि अगर यही हाल रहा तो रेस्टोरेंट के बिजली का खर्च, वेटरों का खर्चा पानी भी निकालना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही ऑन लाइन फूड से सरकार को भी राजस्व नहीं मिलता। सरकार को चाहिए कि वह इसमें नकेल कसे।
होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर एक नजर
वार्षिक कारोबार तकरीबन 50 करोड़ रुपये
शहर में छोटे-बड़े होटल की संख्या 150
शहर में रेस्टोरेंट, ढाबों की संख्या लगभग 600
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