विक्रेता बोले, हमें ही महंगा मिल रहा
नोटों की कालाबाजारी के इस खेल को और गहराई से जानने के लिए बुधवार को चौक पहुंचे। यहां कई दुकानदार नए नोटों की गड्डी बेचते नजर आए। यहां 10 के नोट की गड्डी 1500, 20 के नोट की गड्डी 2200, 50 के नोट की गड्डी 5200, 100 के नोट की गड्डी 1150 रुपये में बिकती मिली। एक दुकानदार ने बताया, शादियों में ज्यादा डिमांड 10 के नोटों की गड्डी की है, यही वजह है कि इसकी कीमत ज्यादा है। वजह पूछने पर एक अन्य दुकानदार ने बताया, उसे खुद ही गड्डी महंगी मिल रही है। एक दुकानदार ने बताया, गनीमत है कि अभी एक गड्डी 1500 की मिल रही है। नौ के बाद लगन तेज होगी और फिर यह रेट 1600 तक जा सकता है। नोट कहां से मिलते हैं, यह पूछने पर सभी दुकानदार चुप्पी साध गए।
नोटों को ज्यादा मूल्य पर बेचना गैरकानूननी
जानकार बताते हैं कि नोटों को उनके निर्धारित मूल्य से ज्यादा दाम पर बेचना गलत ही नहीं गैरकानूनी भी है। एसबीआई के रिटायर बैंक मैनेजर अनिल सिन्हा बताते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 22 और धारा 24 के अनुसार, केवल आरबीआई और भारत सरकार ही कानूनी रूप से मुद्रा जारी कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति नोटों का संग्रह करके उन्हें ‘प्राकृतिक मूल्य’ से अधिक दर पर बेचता है और वह उन्हें निवेश/संग्रहण के नाम पर ऊंची दर पर बेच रहा है, तो यह ‘अनधिकृत मुद्रा व्यापार’ माना जा सकता है। अधिवक्ता राकेश शुक्ला कहते हैं, ऐसे मामले में कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-2019 के तहत भी अपील की जा सकती है। अगर उपभोक्ता को जानबूझकर अधिक मूल्य पर मुद्रा बेचकर ठगा जाता है, तो यह उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है। इसकी शिकायत की जा सकती है।
अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलती है तो जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - अभिजीत कुमार, एडीसीपी नगर