चुनावी वर्ष के दौरान इलाहाबाद में यमुनापार के किसानों के सामने एक बार फिर दशकों पुरानी पटकथा दोहराई जा रही है। मुख्यमंत्री की ओर से इरादतगंज की सभा में जैसे ही यमुनापार के लोगों को बुंदेलखंड जैसी सुविधा देने की घोषणा की गई, सभा में मौजूद ग्रामीणों एवं किसानों की टिप्पणी थी कि ढाई दशक पहले कांग्रेस सरकार ने भी ऐसा ही चुनावी ऐलान किया था लेकिन इस घोषणा के बाद कांग्रेस यूपी की सत्ता में वापसी नहीं कर सकी और योजना धरी की धरी रह गई।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से यमुनापार को बुंदलेखंड का दर्जा दिए जाने की घोषणा के बाद चर्चा शुरू हो गई कि इलाहाबाद लोकसभा सीट से अमिताभ बच्चन के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने यमुनापार को बुंदेलखंड की सुविधा देने की घोषणा की थी। यह घोषणा चुनावी थी। 1988 में हुए लोकसभा उप चुनाव में संयुक्त मोर्चा के प्रत्याशी वीपी सिंह के खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र सुनील शास्त्री को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में कांग्रेस पराजित हो गई। इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से बुंदेलखंड की सुविधा किसानों के लिए छलावा साबित हुई। उप चुनाव के बाद 1989 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश की सत्ता से बाहर हो गई और उसके बाद से अब तक कांग्रेस की वापसी नहीं हो सकी।
बीपीएड बेरोजगार मोर्चा से जुड़े अभ्यर्थी प्रदेश की राजधानी में बीते 45 दिन से अधिक समय से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री इस समय प्रदेश में जहां भी जा रहे हैं, ये अभ्यर्थी वहां पहुंचकर अपनी बात रख रहे हैं। इन अभ्यर्थियों की नारेबाजी के बीच मुख्यमंत्री ने कहा किए ये बीपीएड वाले हैं, जो अपनी मांग को लेकर 45 दिनों से लखनऊ में आंदोलन कर रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने उन्हें कोई आश्वासन नहीं दिया।