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Booker award: संगमनगरी की गलियों में तपकर गीतांजलि श्री ने जीता साहित्य जगत का सोना

Sat, 28 May 2022 11:52 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज

सार

  • रेत समाधि की उपन्यासकार गीतांजलि की बचपन की सहेलियों ने ताजा की पुरानी यादें
  • सेंट मैरीज की छात्रा रही हैं गीतांजलि,पिता अनिरुद्ध पांडेय कभी रह चुके हैं जिले के डीएम
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गीतांजलि श्री - फोटो : social media
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विस्तार
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साहित्य के क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार को जीतकर विश्व पटल पर चमकने वाली उपन्यासकार गीतांजलि श्री का बचपन संगमनगरी की गलियों में बीता है। वह इसी संगम के शहर में पढ़ीं और बड़ी हुई हैं। गीतांजलि की इस उपलब्धि पर उनके बचपन की सहेलियों के पांव जमीन पर नहीं हैं। अब वह उनके साथ बिताए पुराने दिनों को याद कर गौरवान्वित हो रही हैं।

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अपने उपन्यास रेत समाधि के अंग्रेजी अनुवाद पर बुकर पुरस्कार जीत कर विश्व भर में हिंदी की प्रतिष्ठा को बढ़ाने वाली गीतांजलि श्री के पढ़ाई के दिनों की ढेर सारी यादें इस शहर से जुड़ी हैं। शुक्रवार को गीतांजलि के उपन्यास को बुकर मिलने की जानकारी मिलने के बाद स्टैनली रोड से कचहरी जाने वाले उनके उनके पुराने बंगले से उनकी बचपन की कई सहेलियों की स्मृतियां जुड़ गईं।

सेंट मैरीज स्कूल से की 10वीं और 11वीं की पढ़ाई

गीतांजलि सेंट मैरीज स्कूल में 10वीं-11वीं की छात्रा रही हैं। गीतांजलि के साथ सेंट मैरीज में पढ़ने वाली बचपन की सहेली गौरी सक्सेना को जब इसकी जानकारी मिली तब उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। वह स्टैची रोड स्थित अंशुल अपार्टमेंट के अपने फ्लैट में आसपास के लोगों के साथ उन पुराने दिनों को याद करने के साथ खुशियां साझा करने में जुट गई। रेलवे में चीफ कामर्शियल मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हो चुकीं गौरी भी कविता-कहानियां लिखने का शौक रखती हैं।
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हिंदी जगत के लिए बताया गर्व की बात
 
वह बताती हैं कि गीतांजलि के साथ बिताए करीब 50 साल पुरानी यादों को उन्होंने अब भी सहेज कर रखा है। गौरी उन दिनों की आत्मीयता और अपनेपन को याद कर भावुक हो जाती हैं। वह बताती हैं कि गीतांजलि बहुत ही मिलनसार थी। उनकी आंखें हमेशा से परिकल्पनाओं, बड़े सपनों से भरी रही हैं। वह कहती हैं कि उनकी सहेली ने पूरे देश का मान बढ़ाया है। वह ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि वह इसी तरह सृजन के पथ पर और भी बेहतर प्रयोग करती रहें।
 
 
इसी तरह गीतांजलि की बड़ी बहन गायत्री की सहेली इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रोफेसर आशा लाल की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह बताती हैं कि यह दिन पूरे हिंदी जगत के लिए गर्व का है, जिसे गीतांजलि ने दिखाया। हम सबको इस मिट्टी की बेटी पर नाज है। गीतांजलि के पिता अनिरुद्ध पांडेय कभी इस जिले के डीएम रहे हैं। वह इलाहाबाद नगर पालिका के प्रशासक भी रहे।
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