‘आपने कछुए और खरगोश के बीच दौड़ वाली कहानी सुनी होगी। इसमें लक्ष्य के प्रति समर्पण की सीख दी जाती है, लेकिन अब यह सच नहीं है। आज मंजिल पाने के लिए ऐसा स्मार्ट खरगोश बनने की जरूरत है, जिसने आलस्य और ओवर कांफिडेंस को त्यागकर कछुए के गुण को भी समाहित कर लिया हो।’ मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के बीओजी केचेयरमैन विजय कुमार थडानी ने रविवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में भावी इंजीनियरों को यह नसीहत दी।
थडानी ने कहा कि मेक इन इंडिया जैसी योजनाएं इंजीनियरिंग और प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए बड़ी संभावनाएं लेकर आई हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि जिस संस्थान ने उन्हें कुछ करने लायक बनाया उसके तथा वहां के विद्यार्थियों के हित तथा भारत के प्रति खुद के दायित्वों को निभाएं। मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की बीओजी के चेयरमैन प्रोफेसर अशोक मिश्रा ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे ऐसे प्रोजेक्ट पर काम करें जिससे भारत को डिजाइन और उत्पादन का केंद्र बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति में जीत को ही लक्ष्य रखना चाहिए लेकिन उसमें सबका फायदा सामने हो। उन्होंने विद्यार्थियों को नए विचारों के साथ निडरता से आगे बढ़ने तथा गलतियों से न डरने की सीख दी। निदेशक प्रोफेसर राजीव त्रिपाठी ने संस्थान की रिपोर्ट प्रस्तुत कर विद्यार्थियाें के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इससे पहले समारोह में पारंपरिक तरीके से समारोह की शुरुआत हुई। बीटेक में 804, एमसीए में 83, एमटेक में 343, एमएससी एवं एमएसडब्ल्यू में पांच-पांच, एमबीए में 54 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। इनके अलावा 57 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। डिग्री पाने वालों में 251 छात्राएं रहीं। 47 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिए गए। मेडल पाने वालों में 22 छात्राएं हैं। इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की अनुमिता को संस्थान मेडल से नवाजा गया। इसके अलावा अनुमिता को ब्रांच में सबसे अधिक अंक पाने के लिए स्वर्ण पदक तथा दो प्रायोजित मेडल भी दिए गए। स्नातकों में 67 विदेशी विद्यार्थियों को डीएएसए, पांच को विदेश मंत्रालय तथा सात छात्र-छात्राओं को सांस्कृतिक परिषद की ओर से डिग्री प्रदान की गई।
एमएनएनआईटी में रविवार को अवकाश के दिन भी हर्ष और उत्साह का माहौल रहा। मौका था संस्थान के तेरहवें दीक्षांत समारोह का। डिग्री हासिल कर मनचाहे जीवन में प्रवेश का उत्साह विद्यार्थियों के चेहरे पर साफ झलक रहा था।
दो घंटे से अधिक समय तक चले समारोह के दौरान तो विद्यार्थियों ने धैर्य रखा लेकिन समापन के बाद जश्न का जो दौर शुरू हुआ वह रात तक चला। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही नौकरी मिल चुकी है या उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दाखिला ले रखा है। ऐसे में डिग्री लेने के लिए महीनों बाद उनका परिसर में प्रवेश हुआ। इससे उनकी खुशी और बढ़ गई थी। संस्थान पदक विजेता अनुमिता गुप्ता, गोल्ड मेडल पाने वाले दीपांकर कुमार आदि का कहना था कि काफी समय बाद दोस्तों से मिलने का मौका मिला।
एक तरह जहां इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों में सिविल सेवा के प्रति बढ़ती ललक सरकार के लिए चुनौती बनी हुई हैं वहीं सभी वर्ग में सर्वोच्च पाकर एमएनएनआईटी के संस्थान मेडल से नवाजी गईं अनुमिता गुप्ता आगे पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं। हालांकि, बंगलूरू में कोलकॉम प्राइवेट इंडिया लिमिटेड में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर कार्यरत अनुमिता फिलहाल दो साल तक अनुभव लेना चाहती हैं। इसके बाद एमटेक में दाखिला लेने का इरादा है। लखनऊ की अनुमिता के पिता एके गुप्ता भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत हैं। माता बीना गुप्ता गृहणी हैं।
बीटेक की छात्रा अनुमिता गुप्ता को इंस्टीट्यूट मेडल से नवाजा गया। अमन वर्मा को बीटेक तृतीय वर्ष, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव एवं अमन शर्मा को बीटेक द्वितीय तथा स्तुति जैन बीटेक प्रथम वर्ष में सर्वोच्च अंक पाने के लिए गोल्ड मेडल दिया गया। गौरव साहनी को उत्तम परियोजना तथा प्रियांशु श्रीवास्तव को टीसीएस का स्वर्ण पदक दिया गया। स्नातक के विभिन्न वर्ग में सौभाग्य श्रीवास्तव, संकल्प त्रिपाठी, प्रियांजुल शुक्ला, प्रियांशु श्रीवास्तव, दीपांकर कुमार सिंह, प्रियांशु गुप्ता, अनुमिता गुप्ता, विशाल अजमेरा और गौरव अग्रवाल को सर्वोच्च अंक पाने केलिए गोल्ड मेडल दिए गए।
परास्नातक में सांतनु चौधरी, शिवांगी गिरि, सृष्टि, अमित कुमार, सिंधु केजे, निखारे रोशन, राहुल सिंह, मनिष जैन, ऋषि राज सिंह, अमित कुमार, चंचल तलरेजा, भावना शर्मा, विश्वजीत राना, कोनिका गर्ग, राहुल शर्मा, आराधना पटेल, अंजली वर्मा, पटेल चिराग, रोहिनी श्रीवास्तव, शाह मिहिर कुमार, गोपालराव, वैष्णव कुमार सिंह, अवतार सिंह, मोहित बाजपेयी, प्रदीप कुमार यादव, शालिनी अवस्थी, सचिन कुमार गर्ग, विजित चावला, विनीता बेदी, सरस्वती बजाज, स्वाति रावल, अनन्या श्रीवास्तव और आरती को गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इनके अलावा अवतार सिंह, वैष्णव कुमार सिंह, प्रदीप कुमार यादव, तुषार, प्रभात सिंह, विशाल, प्रभाकर कुमार, पियूष चंद्र चतुर्वेदी, सिद्धार्थ चौधरी, प्रांशु अग्रवाल, विशाल अजमेरा, चिरायु कटारा, हिमांशु गौतम, अनुमिता गुप्ता, प्रियांशु गुप्ता, चिनमय पानी, चंचल तलरेजा, गौरव साहनी, प्रियांशु श्रीवास्तव और ऋषि राज सिंह को प्रायोजित मेडल दिए गए।