भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पार्षद रतन दीक्षित ने बुधवार को सभी कयासों पर विराम लगाते हुए इतिहास रच दिया। उन्हें नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुना गया। विपक्षी दलों के संयुक्त प्रत्याशी कमलेश सिंह ने चुनाव में नामांकन ही नहीं किया। नगर निगम के इतिहास में उपाध्यक्ष का चुनाव पहली बार निर्विरोध हुआ है। साफ है कि विपक्षी दलों के पार्षदों का भी उन्हें समर्थन प्राप्त है। विजय के बाद पार्षदों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। मिठाई खाने-खिलाने का क्रम शाम तक जारी रहा।
नगर निगम में महापौर के बाद कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए सियासी दलों के साथ पार्षदों में काफी जोड़तोड़ चलती है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व के निर्देश और महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी की सहमति से मंगलवार रात वार्ड 19 मम्फोर्डगंज के वरिष्ठ पार्षद रतन दीक्षित का नाम भाजपा महानगर अध्यक्ष अवधेश गुप्ता ने उपाध्यक्ष प्रत्याशी के लिए घोषित किया। इससे पहले पार्षद, पूर्व पार्षद संघर्ष समिति की बैठक में वरिष्ठ निर्दल पार्षद कमलेश सिंह को विपक्षी दलों का संयुक्त प्रत्याशी बनाया था।
मंगलवार रात वोटों की गणित की हिसाब से सात कार्यकारिणी सदस्यों वाली भाजपा का पलड़ा भारी था। इस लिहाज से पार्टी प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही थी। इस बीच टिक ट न मिलने से असंतुष्टों के क्रास वोटिंग का खतरा बढ़ गया था लेकिन उसकी नौबत ही नहीं आई। महापौर अभिलाषा पार्टी पार्षदों को असंतुष्ट नहीं मानती लेकिन उपाध्यक्ष पद पर रतन दीक्षित की जीत तय करने में राजनीतिक कौशल के तहत नामांकन के पहले तक लगी रहीं। वहीं रतन के सामने कमलेश सिंह भी आम सहमति के बाद चुनाव लड़ने से पीछे हट गए।
निर्विरोध निर्वाचन के बाद रतन दीक्षित ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व, महापौर, भाजपा महानगर अध्यक्ष और स्थानीय निकाय प्रभारी नवरत्न कत्याल के साथ सभी दलों, निर्दलीय पार्षदों के प्रति आभार जताया। भरोसा दिलाया कि सदैव की तरह ईमानदारी से भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करेंगे। नगर विकास और पार्षदों के मान सम्मान की लड़ाई लड़ते रहेंगे।