इलाहाबाद। पुलिस लाइन में मॉक ड्रिल के दौरान दंगाई की भूमिका निभाने वाले पुलिस कर्मी के हाथ में भगवा झंडा थमाए जाने के विरोध में सुभाष चौराहे पर बीते रविवार को प्रदर्शन करने वाले भाजपाई फंस गए हैं। मामले में जिला और शहर अध्यक्ष सहित 200 कार्यकार्ताओं के खिलाफ सिविल लाइंस थाने मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उनके खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने और विधि विरुद्ध भीड़ जमा करने सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर सिविल लाइंस इंस्पेक्टर की तहरीर पर दर्ज की गई है।
पुलिस लाइन में शुक्रवार को मॉक ड्रिल के दौरान भगवा झंडे का इस्तेमाल किए जाने से भाजपाई और हिंदू संगठन के लोग भड़क गए थे। मामला बढ़ने पर डीजीपी और एसएसपी इलाहाबाद को सफाई देनी पड़ी। यहां तक कि एसएसपी केएस इमैनुएल ने इस मामले में खेद भी जता दिया। इसी आधार पर सोमवार को भाजपाइयों ने इस मुद्दे पर जारी अपना आंदोलन वापस ले लिया लेकिन मंगलवार को भाजपाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।
भाजपा के जिला एवं शहर अध्यक्ष सहित प्रदर्शन में शामिल तकरीबन 200 कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान लोगों को भड़काने की कोशिश की। यहां तक कि प्रदेश सरकार को हिंदू विरोधी सरकार बताया। ऐसे उत्तेजक भाषण देने और कानून का उल्लंघन कर चौराहे पर भीड़ इकट्ठा करने के मामले में सिविल लाइंस इंस्पेक्टर महेश पांडेय ने अपनी ही तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। इंस्पेक्टर ने बताया कि सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान उत्तेजक भाषण देने पर भाजपा के जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष सहित दो सौ के खिलाफ रिपोर्ट लिखी गई है।