काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के आरक्षण को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने याचिका पर विश्वविद्यालय से आठ दिसंबर तक जवाब मांगा है। यदि विश्वविद्यालय इस मामले पर जवाब दाखिल नहीं करेगा तो अदालत इसके बिना ही याचिका तय कर देगी। याचिका की सुनवाई आठ दिसंबर को होगी।
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने राजेश कुमार राय की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि दो सौ से अधिक एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर की भर्ती में 10 वर्ष सहायक प्रोफेसर का अनुभव अर्हता रखी गई है। किसी भी सहायक प्रोफेसर की वार्षिक आय नौ लाख से कम नहीं है।
आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थी की अधिकतम वार्षिक आय आठ लाख रुपये रखी गई है। इस कारण से आर्थिक आय वर्ग का एक भी अभ्यर्थी मिलना असंभव है। ऐसे में सामान्य वर्ग की 21 सीटों का चयन नहीं हो सकेगा। जिससे सामान्य वर्ग के पद खाली रह जाएंगे। इसलिए आर्थिक आय वर्ग का आरक्षण रद्द किया जाए।