प्रिंसिपल ल्यूक ने वर्ष 2007 की अंक तालिका छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर से रोल नंबर 361222 से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया है, उसे ल्यूक ने ही प्रस्तुत किया था। 2012 में ब्वॉयज हाई स्कूल के प्रधानाचार्य पद के लिए बनी साक्षात्कार समिति, जिसमें पांच सदस्य और वह अध्यक्ष थे।
बीएचएस प्रिंसिपल डेविड ल्यूक की मार्कशीट की जांच के लिए डायसिस ऑफ लखनऊ चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप ने पुलिस कमिश्नर को पत्र भेजा है। बिशप का आरोप है, ल्यूक का यह कहना है कि मार्कशीट उनकी नहीं है, सरासर गलत है। बिशप ने पत्र में बताया है कि 2010 में डेविड लुक को ब्यॉयज हाई स्कूल का कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त किया था।
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इसके बाद वर्ष 2012 में ब्वॉयज हाई स्कूल के प्रधानाचार्य के पद का विज्ञापन कराया था जिसमें ल्यूक समेत कई अभ्यर्थियों ने भाग लिया। सभी अभ्यर्थियों ने अपने सभी प्रमाण पत्र की छायाप्रति सेल्फ अटेस्टेड करके जमा किए। इनमें ल्यूक भी शामिल थे जिन्हाेंने समस्त अभिलेख स्वप्रमाणित करके अपने हस्ताक्षर से जमा किए थे और इसकी मूल प्रति उनके पास है। इसमें ल्यूक के ओरिजिनल हस्ताक्षर हैं और सेल्फ अटेस्टेड भी उन्हीं ने लिखा है।
ल्यूक ने वर्ष 2007 की अंक तालिका छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर से रोल नंबर 361222 से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया है, उसे ल्यूक ने ही प्रस्तुत किया था। 2012 में ब्वॉयज हाई स्कूल के प्रधानाचार्य पद के लिए बनी साक्षात्कार समिति, जिसमें पांच सदस्य और वह अध्यक्ष थे, साक्षात्कार के लिए बैठी तो अभ्यर्थियों का जो शैक्षणिक चार्ट बना उसमें सभी अभ्यर्थियों का पूर्ण शैक्षणिक विवरण दर्शाया गया था, जिसके नीचे चयन समिति के पांचों सदस्यों के हस्ताक्षर थे। उक्त चार्ट में भी ल्यूक की ओर से वर्ष 2007 में अंग्रेजी विषय से छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से एमए उत्तीर्ण होना दिखाया गया है। इस प्रकार ल्यूक का यह कहना कि उक्त मार्कशीट उनकी नहीं है, सरासर झूठ एवं धोखा है।
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इतना ही नहीं ल्यूक ने जो बीएड की अंक तालिका दिखाई है, उसमें संस्थागत परीक्षार्थी के रूप में उत्तीर्ण होना दिखाया है। जबकि उन्होंने ब्वॉयज हाईस्कूल से कभी भी उक्त बी. एड. का कोर्स करने के लिए छुट्टी नहीं ली है। जिस सत्र में उन्होंने बीएड की परीक्षा उत्तीर्ण होना दिखाया है, उस वर्ष वह लगातार विद्यालय में उपस्थित रहे और हस्ताक्षर किए।
उस कार्यकाल का वेतन भी अपने खाते में आहरित किया है। नौकरी के साथ बीएड़ के संस्थागत परीक्षार्थी के रूप में पढ़ाई और उत्तीर्ण होना भी दिखाया जो कि कूटरचना एवं जालसाजी की ओर इशारा करता है। जांच में इन तथ्यों को शामिल करने के लिए संबंधित को निर्देशित करें। इस संबंध में बीएचएस प्रिंसिपल से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो पाई।