फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रयागराज: गंगा पूजन के साथ संगम की रेती पर माघ मेला बसाने का श्रीगणेश

Mon, 28 Nov 2022 02:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

संगम तट पर दिन के 11 बजे संतों और अफसरों की मौजूदगी में गंगा पूजन हुआ। आचार्य हरि पांडेय, कृष्ण दत्त तिवारी, भरत मिश्र और उत्सव ने पूजा कराई। इसके बाद मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर आरती उतारी गई।
विज्ञापन
Prayagraj News : माघ मेले संकुशल संपन्न कराने के लिए गंगा पूजन किया गया। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर सोमवार को सविधि मंत्रोच्चार के साथ गंगा पूजन कर माघ मेला-2023 की निर्विघ्नता के लिए साधु-संतों, तीर्थपुरोहितों और अफसरों ने कामना की। इसी के साथ संगम की रेती पर होने वाले संत समागम के लिए तैयारियां तेज कर दी गईं। शिविरों को बसाने का भी श्रीगणेश हो गया।

विज्ञापन



संगम तट पर दिन के 11 बजे संतों और अफसरों की मौजूदगी में गंगा पूजन हुआ। आचार्य हरि पांडेय, कृष्ण दत्त तिवारी, भरत मिश्र और उत्सव ने पूजा कराई। इसके बाद मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर आरती उतारी गई। इस दौरान मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, मेलाधिकारी अरविंद चौहान ने आरती उतारी। निर्विघ्न माघ मेला हो सके, इसके लिए मां गंगा से प्रार्थना की गई। 


पूजन के दौरान बाघंबरी मठ के महंत बलबीर गिरि, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंध समिति के अध्यक्ष स्वामी विमल देव के अलावा आचार्यबाड़ा के साथ ही तीर्थपुरोहितों ने भी आराधना की। 

विज्ञापन

पूजन के बाद मंडलायुक्त ने कहा कि समय रहते मेले की तैयारियां पूरी करा ली जाएंगी। काम तेज करा दिया गया है। उन्होंने अफसरों को मेला क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं का त्वरित गति से विकास कराने के निर्देश दिए। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक (मेला) आदित्य प्रसाद शुक्ल, एसडीएम मेला संत कुमार, आशुतोष कुमार राय के अलावा कई अधिकारी और साधु संत उपस्थित थे।
विज्ञापन

शिविरों को बसाने के साथ ही समतलीकरण का काम तेज
गंगा पूजन के साथ ही संगम की रेती पर मेला बसाने के लिए शिविरों को लगाने का काम शुरू हो गया। समतलीकरण के लिए काम तेज कर दिया गया है। बिजली, विभाग के अलावा पीडब्ल्यूडी, जल निगम के अलावा अन्य विभागों के कैंप कार्यालय बनने लगे हैं। जल्द ही भूमि आवंटन शुरू होगा। समूहों में बसने वाली आध्यात्मिक संस्थाओं को सबसे पहले भूमि आवंटित की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें