इलाहाबाद (ब्यूरो)। भोजपुरी विकास एवं शोध संस्थान, सामाजिक एकता परिषद और भोजपुरी पंचायत पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को राजर्षि टंडन सेवा केंद्र में राष्ट्रीय भोजपुरी संगम आयोजित किया गया। जिसमें देश-विदेश में भोजपुरी के विकास को लेकर काम कर रहे विद्वानों ने इसके सम्मान, संरक्षण और आठवीं अनुसूची में इसे समाहित करने पर मंथन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और विभु बाजपेयी के वंदना नृत्य से हुई।
भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मारीशस की अध्यक्ष डॉ. सरिता बुधु ने कहा कि भोजपुरी को विश्वस्तर पर बढ़ाने के लिए एक आंदोलन की जरूरत है क्योंकि आम जनमानस में इसे ही दृष्टि से देखा जाता है। न्यायमूर्ति अंशुमान सिंह ने कहा कि भोजपुरी सरल और सहज है। इसमें प्रेम और सौहार्द है। भोजपुरी की विशालता को देखते हुए इसमें आठवीं अनुसूची में शामिल शामिल किया जाना चाहिए। बीएचयू के प्रो. सदानंद शाही ने कहा कि सबसे पहले तो लोगों भोजपुरी को लेकर हीनता की ग्रंथी को बाहर निकाला होगा। जो भाषा हम बोल रहे हैं उसका सम्मान हमें अपनी नजरों में सबसे पहले करना होगा।
इसके साथ ही बिहार कनेक्ट इंटरनेशनल, लंदन के अध्यक्ष उद्देश्वर सिंह, भोजपुरी एकेडमी बिहार अध्यक्ष चंद्रभूषण राय, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुभाष राठी, ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद शंकर सिंह ने भोजपुरी के विकास पर विचार व्यक्त किए। सांस्कृतिक अतिथि श्लेष गौतम ने कहा कि भाषा-बोली में हमारे संस्कार समाहित हैं। हमारा दायित्व है कि हम इसके आगे ले जाएं। उनकी पंक्तियों ‘हरा बैगनी लाल पीयर, न रंग बिरंगा चाही, इंद्रधनुष न चाही हमके, हमें तिरंगा चाही’ को खूब पसंद किया गया। भोजपुरी गायक दीपक त्रिपाठी और खुशबू उत्तम ने अपनी प्रस्तुतियों से खूब तालियां बटोरी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति प्रो. केएनएस यादव ने की। कार्यक्रम का संचालन भोजपुरी विकास एवं शोध संस्थान के महासचिव अजीत सिंह और धन्यवाद ज्ञापन सर्व शिक्षा अभियान के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी अजीत विक्रम सिंह ने किया। इस दौरान सामाजिक एकता परिषद अध्यक्ष ओम प्रकाश शुक्ला, डॉ. चंद्रशेखर यादव, नीरज नयन सिंह, श्रीनारायण यादव, धर्मेंद्र यादव, मनोज कुमार समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।