सूबे के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को बैठने के लिए बेंच-डेस्क मुहैया कराने में करीब पौने चार सौ करोड़ रुपये का खर्च आएगा। प्रदेश सरकार ने यह जानकारी बुधवार को हाईकोर्ट में स्कूलों में बच्चों के जमीन पर बैठने के मामले में सुनवाई के दौरान दी। सरकार ने इसका इंतजाम करने के लिए अदालत से और समय देने की मांग की है। प्रकरण की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने सरकार से कहा है कि वह बेंच-डेस्क का इंतजाम करे, अदालत इसकी मॉनीटरिंग करती रहेगी।
जालौन के कृष्ण प्रकाश त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के बच्चों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था नहीं है। बच्चों को हर मौसम में टाट पट्टी या बोरे पर बैठाया जाता है। इस पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि बच्चों को जमीन पर क्यों बैठाया जा रहा है। बेंच का प्रबंध करने की दिशा में सरकार क्या कदम उठा रही है।
सरकार की ओर से कहा गया कि प्रदेश में करीब एक लाख प्राथमिक स्कूल हैं। सभी में डेस्क और बेंच का इंतजाम करने में करीब पौने चार सौ करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इतने बड़े पैमाने पर खर्च के लिए वित्त विभाग की मंजूरी और कैबिनेट का निर्णय आवश्यक होगा। इसमें कुछ वक्त लगेगा। मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने खर्च का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्राइमरी स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक कक्षाएं चलती हैं। प्रत्येक कक्षा में औसतन 32 छात्र होते हैं। इस प्रकार से एक कक्षा के लिए 16 बेंच-डेस्क की आवश्यकता होगी। इस प्रकार से एक प्राइमरी स्कूल को 16 गुणा पांच यानी 85 बेंच-डेस्क की आवश्यकता होगी। अपर प्राइमरी में तीन कक्षाएं चलती हैं इस हिसाब से वहां 48 बेंच-डेस्क चाहिए। इस हिसाब से एक लाख स्कूलों के लिए पौने चार हजार लाख (पौने चार सौ करोड़) रुपये का खर्च आएगा। कोर्ट इस मामले पर छह फरवरी 2017 को सुनवाई करेगी। इस तारीख को सरकार से प्रगति बताने के लिए कहा गया है।