इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अभ्यर्थी का प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल होना, उसे नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रतीक्षा सूची अनिश्चित काल तक प्रभावी नहीं रह सकती।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अभ्यर्थी का प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल होना, उसे नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रतीक्षा सूची अनिश्चित काल तक प्रभावी नहीं रह सकती। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने असिस्टेंट टीचर (एलटी ग्रेड) भर्ती-2016 से जुड़े मामले में नीतीश मौर्य समेत पांच की याचिकाएं खारिज कर दीं।
विज्ञापन
याचियों ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से 2016 में जारी विज्ञापन के तहत भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था। यह भर्ती प्रदेश के मान्यता और सहायता प्राप्त निजी प्रबंधन वाले हायर सेकेंडरी स्कूलों में 22 विषयों के कुल 7,950 पदों के लिए थी। याचिकाकर्ताओं का नाम न तो मुख्य मेरिट सूची में आया और न ही प्रतीक्षा में, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं।
सुनवाई के दौरान प्रश्न उठा कि क्या बोर्ड के लिए कुल रिक्तियों के 25 प्रतिशत तक प्रतीक्षा सूची जारी करना अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बोर्ड पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। प्रतीक्षा सूची पांच या 10 प्रतिशत तक भी सीमित हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पुरानी प्रतीक्षा सूची में बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं थी।