इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में व्याप्त अराजकता तथा बिगड़ी कार्य संस्कृति की अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने चुनिंदा संस्थानों को विश्व स्तरीय इंस्टीट्यूट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है लेकिन ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ नाम से जाना जाने वाला 129 साल पुराना यह विश्वविद्यालय इसके लिए आवेदन ही नहीं कर पाएगा। इसकी मुख्य वजह नैक ग्रेडिंग न होना है। इसके अलावा रैंकिंग में भी विश्वविद्यालय का काफी नीचे होना है। जबकि, आवेदन की ये प्रमुख शर्तें हैं।
विश्व स्तरीय सूची में केंद्रीय संस्थानों के अलावा निजी विश्वविद्यालय भी शामिल हो सकते हैं। इसके लिए पॉलिसी बनाई गई है। साथ में मंत्रालय ने सुझाव भी मांगे हैं। पॉलिसी का पूरा विवरण तथा अन्य जानकारी यूजीसी की वेबसाइट पर जारी की गई है। इसके अलावा विश्वविद्यालयों को भी यूजीसी की ओर से इस बाबत पत्र भेजा गया है। इसके अनुसार विश्व स्तरीय संस्थानों की सूची में शामिल होने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की ओर से हाल में जारी प्रथम 25 रैंक वाले ही आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा नैक की ग्रेडिंग होनी चाहिए। कई अन्य शर्तें भी हैं। इसके विपरीत केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने नैक की ग्रेडिंग हासिल नहीं की है। इस दौरान नैक का निरीक्षण ही नहीं हुआ। इसके अलावा विश्वविद्यालय की रैंकिंग भी 69 है। ऐसे में विश्वविद्यालय आवेदन ही नहीं कर पाएगा।