माघ मेले में जसवारा प्रतापगढ़ के वेद प्रकाश मिश्र ने अपने छोटे भाई पुनीत के लिए जालंधर से आए रविंद्र मिश्र की बेटी से शादी तय की है। पुनीत को लड़की के माता-पिता देख चुके हैं। रिश्ता लगभग तय है, आने वाले दिनों में अगर कोई अड़चन नहीं आई तो बरीक्षा की रसम भी यहीं की जाएगी। वहीं गंगोली शिवाला में कल्पवास कर रही तिवारीपुर गोरखपुर की अंजू दूबे ने अपनी देवरानी के बेटे मनीष के लिए कल्पवासी नारीबारी के नर्वदा प्रसाद तिवारी की बेटी से रिश्ते की बात चलाई है।
यह दो तो महज उदाहरण भर हैं, संगम की रेती पर धर्म आध्यात्म के साथ ही सात जन्मों के रिश्ते भी बन रहे हैं। घर के बुजुर्ग को एक माह के कल्पवास में धर्म में रमे होने के बीच अपनी जिम्मेदारियों को भी नहीं भूले हैं। माघ मेले में देश के कोने-कोने से आए कल्पवासियों के ‘कुरिया’ (शिविर) में भजन, कीर्तन के साथ ही शादी-ब्याह की बातें भी चल रही हैं। अजनबियों के बीच 20 दिनों में संबंध इतने आत्मीय बन गए हैं कि साथ में गंगा स्नान, प्रवचन सुनने, खाना बनाने, सब्जियां खरीदने जैसे काम साथ में करने के साथ ही रिश्ते की बात तक चल रही है।
शादी योग्य लड़के-लड़की के रिश्तों की बात को आगे बढ़ाने और जानकारियों के आदान प्रदान भी खूब हो रहे हैं। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र ने बताया कि कल्पवासियों का ऐसा मानना है कि संगम की रेती पर तय होने वाले रिश्ते सफल होते हैं। इसलिए उनकी कोशिश होती है कि रिश्ते यहां तय हो जाएं। तीर्थ पुरोहित बच्चा पाठक ने बताया कि उनके शिविर में रहने वाले कल्पवासी अपने परिवार के विवाह-योग्य युवक-युवतियों के रिश्ते की बात चलाते हैं। इस बार भी दो रिश्तों के तय हुए हैं। महाकुुंभ के दौरान आधा दर्जन से अधिक रिश्ते तय हुए थे।