इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, बरेली के क्लर्क को अनुशासनात्मक कार्यवाही में मिली सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को मामले पर नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, बरेली के क्लर्क को अनुशासनात्मक कार्यवाही में मिली सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को मामले पर नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ ने रणजीत कुमार की याचिका पर दिया।
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याची को 20 दिसंबर 2021 को निलंबित कर दिया गया था। उन पर एक खाताधारक को 70 हजार के आहरण पर 69,500 रुपये का भुगतान करने का आरोप लगाया गया। कैश गिनते समय 400 रुपये कम पाए गए। ग्राहकों से उधार लिया, जिससे बैंक की छवि धूमिल हुई। बिना किसी सूचना या अवकाश के अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया गया। इन सब मामलों में आरोप पत्र जारी किया गया और जांच अधिकारी ने याची को दोषी पाया।
उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया गया और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। 28 फरवरी 2023 को बैंक की प्रबंधन समिति के निर्णय के अनुसार सचिव/मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने याची के दो वेतन वृद्धियों को रोकने की सजा सुनाई। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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कोर्ट ने कहा कि अधिकारी के आदेश में कारण न बताने से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने 28 फरवरी 2023 के आदेश को रद्द कर दिया। वहीं, प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता को सुनवाई का आवश्यक अवसर प्रदान करने के बाद नए सिरे से तर्कपूर्ण और सुविचारित आदेश पारित करें।