Bar council angry at being lax in protecting the courts
प्रयागराज। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की रविवार को हुई बैठक में वकीलों पर हमले और अदालतों की सुरक्षा में कोताही पर गहन चर्चा की गई। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी न्यायालयों, न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा न देने और कई बार पत्र लिखने के बाद भी मुख्यमंत्री की ओर से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर बार कौंसिल ने नाराजगी जताई। कौंसिल ने 16 जनवरी को विरोध दिवस के साथ ही चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
बार कौंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने प्रदेश सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को न्यायालय की सुरक्षा का आदेश दिया था। इसके बाद न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने न्यायालय परिसर की सुरक्षा के आदेश पारित किए। लेकिन, राज्य सरकार ने न्यायालय के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया है। चेयरमैन ने कहा कि राज्य सरकार से लखनऊ के अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी, प्रयागराज के अधिवक्ता सनाउल्ला खां की हत्या में शामिल लोगों की जल्द गिरफ्तारी, परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, 70 वर्ष तक की आयु में मृत अधिवक्ताओं के आश्रितों को मिलने वाली पांच लाख रुपये की राशि जारी करने के लिए उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण न्यासी निधि समिति को 500 करोड़ का कार्पस फंड जारी करने की मांग की गई है।
अनुदान के लिए भटक रहे सदस्यों के लिए जल्द धनराशि जारी करने, एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने और प्रदेश के सभी न्यायालयों में चहारदीवारी बनाने और अधिवक्ताओं की हत्याएं रोकने की भी आवाज उठाई गई । चेताया गया कि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई तो 16 जनवरी से बार कौंसिल सदस्य न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए विरोध दिवस मनाएंगे। इसके अलावा 18 जनवरी को राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिलकर समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी। समाधान नहीं होने पर जिला और तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारी जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। चौथे चरण में 17 फरवरी को लखनऊ में पुराने हाईकोर्ट से विधानसभा मुख्यमंत्री आवास तक अधिवक्ता शृंखला बनाकर विरोध करेंगे।
अधिवक्ताओं को बदनाम कर रहा सरकारी तंत्र: नगरहा
प्रयागराज। बार कौंसिल के उपाध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा ने बताया कि बीते जून से अब तक प्रदेश में 11 अधिवक्ताओं की हत्या हो चुकी हैं। इसमें बार कौंसिल की पहली महिला अध्यक्ष दरवेश यादव की भी हत्या की घटना शामिल है। हर महीने किसी ना किसी जिले में वकील की हत्या हो रही है। प्रदेश का सरकारी तंत्र अधिवक्ताओं को बदनाम करने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन उनकी आड़ में सभी पर सवाल उठाना ठीक नहीं है।