इलाहाबाद। हाईकोर्ट के चर्चित न्यायाधीश जस्टिस रवींद्र सिंह ने मंगलवार को सेवानिवृत्त होने के बाद बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बार और बेंच एक ही सिक्के के दो पहलू हैं दोनों को अलग करके नहीं देखा जा सकता है। अपने विदाई समारोह के बारे में उन्होंने कहा कि यह विदाई नहीं पुनर्मिलन समारोह है। बार में आकर मैं हमेशा महसूस करता हूं कि जैसे कोई बच्चा अपनी मां की गोद में आ गया हो। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि बार और बेंच परस्पर एक दूसरे का सम्मान करें।
जस्टिस सिंह युवा अधिवक्ताओं को नसीहत दी कि अधिवक्ता समाज का एक अलग वर्ग है जिसका महत्व आम लोगों से कहीं ऊपर है मगर वकीलों को अपने इस स्तर को बनाकर रखना होगा वरना जनमानस की धारणा उनके प्रति बदल जाएगी। समारोह में मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड ने भी अपने विचार व्यक्त किए। हाईकोर्ट बार एसोएिशन के अध्यक्ष आरके ओझा और महासचिव अशोक सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष दयाशंकर मिश्र तथा अन्य पदाधिकारियों ने जस्टिस सिंह को स्मृति के तौर पर हनुमान जी प्रतिमा भेंट की।
कार्यक्रम का संचालन पूर्व संयुक्त सचिव शशि प्रकाश सिंह ने किया। इस मौके पर हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, न्यायमूर्ति वीके शुक्ला, न्यायमूर्ति आरडी खरे, न्यायमूर्ति वी रमेश, न्यायमूर्ति मो. ताहिर, न्यायमूर्ति शशिकांत, न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी, न्यायमूर्ति रणविजय सिंह भी मौजूद थे। बार पदाधिकारियों ने सभी का फूलमाला पहना कर स्वागत किया। विदाई समारोह के मौके पर लाइब्रेरी हाल वकीलों से खचाखच भरा रहा। बार के पदाधिकारियों में सुनील सिंह, आनंद मोहन पांडेय, वीके पांडेय, रुचिर श्रीवास्तव, सिपाही लाल शुक्ला, सुधीर सिंह चंद्रौल, रणविजय सिंह, जनार्दन यादव, राजीव शुक्ला, हिमकन्या श्रीवास्तव, विवेक मिश्रा, केएम त्रिपाठी, जेबी सिंह सहित तमाम अधिवक्ता मौजूद थे।