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छह वर्ष में बैंकों में 50 फीसदी रह गई वैकेंसी

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Banks vacancies shrinks 50 percens in last six years
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-2015 में करीब 37 हजार अफसरों और कर्मचारियों की हुई थी भर्ती, 2020 में करीब 18 हजार पदों के लिए शुरू है प्रक्रिया
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प्रयागराज। बैंक की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवाओं को लगातार निराशा हाथ लगी है। विगत वर्षों में वैकेंसी की संख्या में लगातार कमी आई है। 2015 से तुलना करें तो इस वर्ष 50 फीसदी से भी कम पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।
राष्ट्रीयकृत, ग्रामीण बैंकों में इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) के माध्यम से भर्ती की जाती है। अब कोऑपरेटिव बैंक में भी आईबीपीएस के माध्यम से भर्ती की जाने लगी है। इनके अलावा एसबीआई अपने लिए खुद भर्ती करता है। प्राप्त आंकड़ों के अलावा 2015 में करीब 37 हजार पदों पर भर्ती की गई थी। इनमें पीओ के 12 हजार से अधिक पदों पर भर्ती हुई थी।
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वहीं इस वर्ष 2600 पदों पर भर्ती हो चुकी है। कोऑपरेटिव बैंक में साढ़े नौ हजार से अधिक पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। एसबीआई में भी क्लर्कल तथा ऑफिसर्स के अलग-अलग वर्ग में भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस वर्ष कुल करीब 18 हजार पदों पर भर्ती किए जाने की उम्मीद की जा रही है।
बैंकों में वर्षवार भर्ती की स्थिति
वर्ष कुल भर्ती (लगभग)
2020 18000 (संभावित)
2019 16400
2018 11500
2017 11400
2016 28500
2015 37000
एसबीआई में वीआरएस की तैयारी
0 एसबीआई में वीआरएस की तैयारी शुरू हो गई है। 55 वर्ष की आयु पूरी करने या 35 वर्ष की नौकरी पूरी करने वालों को वीआरएस दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि सर्कुलर जारी होने तक अफसर इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
‘हर शाखा में कर्मचारियों की कमी है। पीएनबी (मर्जर वाले बैंक की शाखाएं शामिल नहीं हैं) में यहां 25 शाखाएं हैं, जिनमें तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 136 कर्मचारी हैं। हर शाखा में दो से तीन कर्मचारी कम हैं। इस संबंध में प्रबंधन से बात करने पर बताया गया कि शाखाओं में जरूरत से अधिक स्टाफ है। इसमें और कमी की जानी है।’ -शशिकांत श्रीवास्तव, कर्मचारी नेता
‘हर शाखा में कर्मचारियों की कमी है। इसकी वजह से उन पर वर्कलोड है लेकिन प्रबंधन भर्ती नहीं करने की बात कह रहा है। मर्जर के बाद कर्मचारियों की संख्या में और कमी होगी। इसे लेकर अलग-अलग फोरम पर लगातार आवाज उठाई जाती है।’ -मदनजी उपाध्याय, जिला अध्यक्ष-यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन
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राज्य कर्मचारियों की संख्या में भी कमी
-राज्य कर्मचारियों की संख्या भी 25 फीसदी तक कम हो गई है। पूरे प्रदेश में समूह ग के करीब 18 लाख कर्मचारी हुआ करते थे लेकिन अब संख्या घटकर करीब 12 लाख रह गई है। उत्तर प्रदेश कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष नरसिंह ने बताया कि समूह घ में भी कर्मचारियों की संख्या पांच लाख से घटकर तीन लाख रह गई है। बताया कि जिले में भी समूह ग और घ में कुल 25 हजार कर्मचारी हैं। इनमें से तीन हजार सफाई कर्मी हैं। वहीं पूर्व में कर्मचारियों की संख्या 27 जार होती थी।
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