इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले और उन्हें सरप्लस (अतिरिक्त) घोषित करने की राज्य सरकार की नीति पर नाराजगी जताई है। साथ ही 2026 की तबादला नीति के उस हिस्से और उसके आधार पर जारी स्थानांतरण आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जो शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 का उल्लंघन करते हैं।
इसके साथ ही प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने विपिन कुमार आर्य की याचिका पर दिया। याची की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक जून 2026 को स्थानांतरण संबंधी गाइडलाइन जारी की थी। इसमें सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए 20 नवंबर 1976 के शासनादेश को आधार बनाया गया। जबकि, यह व्यवस्था आरटीई अधिनियम में निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुरूप नहीं है। इसी नीति के आधार पर याची को सरप्लस घोषित करते हुए 30 जून को प्रयागराज राजकीय इंटर कॉलेज से स्थानांतरित कर दिया गया।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 2017 में राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल कर आश्वासन दिया था कि भविष्य में आरटीई अधिनियम के अनुसार नई स्थानांतरण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बावजूद सरकार ने एक बार फिर उसी पुराने शासनादेश के आधार पर तबादला नीति लागू कर दी।