मंडलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल के निर्देश पर कुंभ कार्यों के भुगतान में सतर्कता बरतते हुए मेला प्रशासन ने कई विभागों की अब तक स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 670 करोड़ रुपये के आहरण पर रोक लगा दी है। बिलों में वर्णित कार्यों का सत्यापन करने के बाद ही भुगतान करने का निर्णय मेला प्रशासन ने लिया है।
कुंभ मेला बजट के लिए स्वीकृत इस बड़ी धनराशि का आहरण मेला प्रशासन की ओर से इसलिए नहीं किया गया क्योंकि विभिन्न विभागों द्वारा इस धनराशि के लिए प्रस्तावित बिलों की सत्यापन आख्या, प्री आडिट, पोस्ट आडिट तथा थर्ड पार्टी निरीक्षण में इंगित कमियों के निराकरण संबंधी परीक्षण नहीं हो सका है। ऐसे में इन विभागों की धनराशि का आहरण अब अगले वित्तीय वर्ष में केवल वास्तविक आकलन के अनुरूप ही किया जाएगा।
इसमें कड़ाई से परीक्षण और कटौतियों के आधार पर करीब 225 करोड़ रुपये तक की धनराशि बचने की उम्मीद जताई जा रही है। उल्लेखनीय है है कि कुंभ मेला बजट के तहत कुल 2686 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। मंडलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल ने वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में इस बात के कड़े निर्देश दिए थे कि जल्दबाजी में बिना व्यापक परीक्षण तथा वांछित निरीक्षण आख्या के बिना भुगतान न किए जाएं। परिणाम रहा कि जिन विभागों के कार्यों के संबंध में परीक्षण संबंधी आख्या संतोषजनक नहीं मिली, उनके भुगतान से संबंधित धनराशि का आहरण ही नहीं किया गया।
मंडलायुक्त ने कहा है कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि एक-एक पाई का केवल वास्तविक भुगतान संतोषजनक कार्य के सापेक्ष ही हो। बची हुयी धनराशि शासकीय कोष में वापस कर दी जाए। मंडलायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी विभाग का कोई भी भुगतान रोका नहीं जा रहा है, लेकिन समुचित परीक्षण के बाद संतोषजनक कार्य के सापेक्ष केवल वास्तविक भुगतान की ही स्वीकृति दी जाएगी।