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कहीं बालि वध तो  कहीं धू-धू कर जली लंका 

Sat, 08 Oct 2016 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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allahabad
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इलाहाबाद। रामलीला का मंचन जैसे-जैसे समाप्ति की ओर से बढ़ रही है वैसे-वैसे इसका असर गहरा होता जा रहा है। रामलीला मंचन स्थलों पर लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को  शहर की रामलीला कमेटियों की ओर से रामकथा के विविध प्रसंगों का मंचन किया गया। 
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 पजावा रामलीला कमेटी की ओर से पजावा रामलीला मैदान पर सीता के राम शीर्षक के तहत बालि वध से लंका दहन तक की लीला मंचित हुई।। बालि, सुग्रीव युद्ध, भगवान राम का पेड़ के पीछे से बालि पर बाण मारना, बालि का भगवान राम को प्रणाम करना और अपने वध करने की वजह पूछना, राम का मानव धर्म के बारे में बताना, हनुमान जी का समुद्र लांघना, लंका दहन, इंद्रजीत मेघनाद का हनुमान जी को बंदी बनाना आदि प्रसंगों की लीला मंत्रमुग्ध करती रही। इससे पहले शाहगंज स्थित राम मंदिर में भगवान राम की पूजा अर्चना की गई। सुबह केला शृंगार चौकी निकाली गई। इस अवसर पर मोहन जी टंडन, सचिन गुप्ता, अमिताभ टंडन, श्याम जी अग्रवाल, राजेश मेहरोत्रा, गिरी शंकर प्रभाकर, आदित्य टंडन आदि उपस्थित रहे। 
  श्रीपथरचट्टी रामलीला कमेटी की ओर से रामबाग रामलीला मैदान पर भरत मिलाप, सूपर्णखा की नासिका भंग , खरदूषण वध आदि प्रसंगों की लीला मंचित हुई। भरत का ननिहाल से आना, राम को वन से वापस लाने के संकल्प के साथ प्रस्थान करना। चित्रकूट में राम से मिलना, उनसे अयोध्या लौट चलने के लिए प्रार्थना करना, राम का पिता की आज्ञा का पालन करने पर अडिग रहना, भरत का खड़ाऊं लेकर अयोध्या वापसी, राम का अगस्त्य मुनि के आश्रम पहुंचना वहां राक्षसों के अत्याचारों के बारे जानकारी मिलना। अत्रि एवं सती अनसुइया के आश्रम पहुंचना। अत्रि का राम को दिव्य अस्त्र प्रदान करना, पंचवटी में सूपर्णखा का राम पर मुग्ध होना, विवाह प्रस्ताव, लक्ष्मण द्वारा नासिका भंग करना आदि का मंचन भावविभोर करता रहा। 
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श्रीकटरा रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला परेड मैदान रामवाटिका में भरत मिलाप, राम का पंचवटी प्रस्थान सूर्पणखा की नासिका भंग, खरदूषण वध प्रसंग की लीला मंचित हुई। बाघम्बरी क्षेत्र श्रीराम लीला कमेटी  भरद्वाजपुरम  में रामराज्याभिषेक की तैयारी, रामवनगमन, दशरथ मरण, श्री राम लीला समिति  गुरु तेग बहादुर नगर करेली में दशरथ मरण, भरत मिलाप, जयंत उद्धार, सिविल लाइंस में राम राज्याभिषेक लीला मंचन हुई।


दारागंज में जली लंका, हनुमान-रावण संवाद 
  दारागंज शृंगार भवन से राम की सवारी जब अलोपीबाग लीला स्थल पहुंची तो वहां स्वामी शिवमंगल दास की देखरेख में लंका दहन, हनुमान-रावण संवाद, रामेश्वरम स्थापना तक की लीला मंचित हुई। जब सवारी  दारागंज स्टेशन के शरद नर्सिंग होम पहुंची तब काली प्राकट्य की लीला हुई। शृंगार, पूजन के बाद देवी भक्तों को दर्शन देने निकलीं। धकाधक चौराहे पर क्षेत्रीय नागरिकों एवं प्रयागराज सेवा समिति की ओर से धूप गुग्गल से आरती कर नारियल नीबू जायफल की बलि दी गई। रौद्र रूप में काली बक्शी खुर्द से पुलिस चौकी, बक्शी त्रिमुहानी से होते हुए शृंगार भवन पहुंचने पर लीला पूरी हुई। समसामयिक विषयों पर आधारित स्वांग की प्रस्तुतियां भी खूब रहीं। काली प्राकट्य लीला के दौरान ध्रुव नारायण शुक्ल, मधु चकहा, कृष्ण कुमार चौरसिया, अखिलेश निराला, जितेंद्र गौड़, संजय पाठक, तीर्थराज पांडेय, पवन यादव आदि उपस्थित रहे। 
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