हरि प्रसाद बोले- नहीं लगता था पढ़ाई में मन
सवाल करते हुए पूछा कि आप पहलवानी के माहौल से निकले हैं। अखाड़ों से निकलकर बांसुरी तक खिचांव कैसे हुआ? जवाब में हरि प्रसाद ने कहा कि इलाहाबाद के अग्रवाल कॉलेज में पढ़ाई हुई थी। पढ़ाई में मन नहीं लगता था। स्कूल के प्रधानाचार्य केदारनाथ गुप्ता ऐसे ही पास कर देते थे। इसी तरह बांसुरी बजाने लगा। इसके बाद लूकरगंज में एक टाइपिस्ट के यहां काम करने लगा। जितना बोलता था उतना टाइप कर देता था। फिर काम के दौरान भी बांसुरी बजाया करता था।
18 वर्ष की उम्र में स्टेट गवर्नमेंट की नौकरी मिल गई। उसमें भी मन नहीं लगा। इसके बाद बांसुरी ही मेरी पढ़ाई बन गई। नौकरी की वजह से ओडिशा ट्रांसफर हो गया था। फिर एक रेडियों में बांसुरी बजाया था। धीरे-धीरे लोग जानते गए। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद से ज्यादा सुंदर दूसरा कोई शहर नहीं है। पहले बिजली घर के पास डर लगता था। लेकिन, अब तो लगता है कि मुंबई छोड़कर यहीं वापस आ जाऊं।
स्मिता ने पूछा कि आपने बांसुरी वादन में कुछ संशोधन किए होंगे। तभी इंटरनेशनल तक पहुंच पाएं हैं। आपने क्या-क्या परिवर्तन किए। इस पर उनका जवाब था कि मैं बहुत ही अनपढ़ हूं। भगवान की तरफ से बांसुरी एक क्रिएशन है। बांस का टुकड़ा लेकर बजाता रहता था। कहा कि कृष्णजी बांसुरी बजाते थे तो गोपियां फिदा हो जाती थीं, लेकिन, मेरे बजाने पर कोई घर से बाहर नहीं निकलती थी। इसके बाद सवाल में पूछा कि आपके संगीत में अनुराधा जी का क्या योगदान है। इस पर उन्होंने कहा कि संगीत का आदर करती हैं।
लंतरानी ने लोगों का किया जमकर मनोरंजन
बिशप जॉनसन स्कूल एंड कॉलेज में 20 दिसंबर से तीन दिवसीय बज्म-ए-विरासत में सितारों की महफिल सजी। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित हरी प्रसाद चौरसिया ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। पहले दिन का मुख्य आकर्षण लंतरानी रहा। जिसमें साहित्यकार यश मालवीय, प्रो. धनंजय चोपड़ा, बाबा अभय अवस्थी, कमर आगा, इसमें दारागंज, लोकनाथ और पुराने शहर की चर्चाएं होंगी। पुराने इलाहाबाद के किस्से और कहानियां में चर्चा में अभय अवस्थी, प्रो. धनंजय चोपड़ा, कमर आगा और आसिफ उस्मानी आदि ने इलाहाबादी लंतरानी के माध्यम से लोगों का जमकर मनोरंजन किया।