बाइक बॉट के नाम से देशभर के लाखों लोगों को करोड़ों का चूना लगाने वाली कंपनी के दो निदेशकों को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। इन्होंने हाईकोर्ट में जमानत और अग्रिम जमानत के लिए याचिकाएं दाखिल की थी। कंपनी के उपनिदेशक विशाल कुमार ने जमानत अर्जी दाखिल की थी। जबकि एक अन्य सचिन भाटी ने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी। इन अर्जियों पर न्यायमूर्ति ओम प्रकाश सप्तम ने सुनवाई की।
अपर शासकीय अधिवक्ता सैय्यद अली मुर्तजा ने इन जमानत अर्जियों का विरोध करते हुए कहा कि विशाल कुमार ने बिना अधीनस्थ न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल किए सीधे हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया है। जो निर्धारित प्रक्रिया के विरुद्ध है। इस दलील के बाद याची के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी वापस लेने की इच्छा जताई जिसे मंजूर करते हुए कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी। इसी प्रकार से सचिन भार्टी के अधिवक्ता ने भी पहले अधीनस्थ न्यायालय में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने की इच्छा जताते अर्जी वापस लेने की मांग की जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
इन निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने बाइक बॉट के नाम से एक निवेश योजना शुरु की जिसमें ग्राहकों को प्रलोभन दिया गया कि वह कंपनी में 60 हजार रुपये का निवेश करें। इस रकम से बाइक खरीदी जाएगी। बाइक कंपनी के पास ही रहेगी मगर निवेशक को हर माह दस हजार रुपये एक साल तक मिलेंगे इस प्रकार साल भर में उसकी रकम दोगुनी हो जाएगी। योजना में देश भर से लगभग दो लाख लोगों ने पैसा लगाया। इस प्रकार से कंपनी न।। करीब 1500 करोड़ रुपये का निवेशकों को चूना लगाया। कंपनी के निदेशकों के खिलाफ 55 प्राथमिकियां दर्ज कराई गई है। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा कर रही है।