इलाहाबाद हाईकोर्ट ने त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में हुई किसान की चर्चित हत्या में उम्रकैद की सजा काट रही महिला की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। साथ ही सजा के क्रियान्वयन और जुर्माने की वसूली पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला की खंडपीठ ने रूबी अग्रवाल की ओर से दाखिल आपराधिक अपील पर दिया है। मामला अमरोहा जिले के रजबपुर थाना क्षेत्र का है। शकरपुर समसपुर निवासी किसान नरेंद्र सिंह 27 सितंबर 2019 को घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं आए। पिता समरपाल सिंह ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बाद में नरेंद्र की पत्नी बालेश देवी ने शक जताते हुए मुरादाबाद के मझौला थाना क्षेत्र निवासी रूबी अग्रवाल और उसके साथियों पर अपहरण व हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
अभियोजन की कहानी के मुताबिक, पुलिस जांच और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के जरिये चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दावा किया गया कि रूबी का संबंध नरेंद्र से था। इसी बीच मुरादाबाद के बिलारी में तैनात सिपाही योगेश से भी उसके रिश्ते बने। नरेंद्र योगेश और रूबी के रिश्ते में बाधक बन रहा था। इसलिए रूबी ने सिपाही योगेश और उसके दोस्त वीरपाल व विशेष के साथ मिलकर नरेंद्र की हत्या कर दी। शव को विशेष के मकान के पीछे स्थित कुएं में फेंक दिया था। ट्रायल कोर्ट ने रूबी, सिपाही योगेश व विशेष को उम्रकैद और 20- 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। शव छिपाने के दोषी वीरपाल को पांच साल की सजा मिली थी। सजा के खिलाफ रूबी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अपील संग दाखिल जमानत अर्जी पर रूबी के अधिवक्ता ने दलील दी कि मृतक के गायब होने और गुमशुदगी व एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी का कोई तार्किक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। मृतक की पत्नी ने पति को आखिरी बार दाता राम संग दिखने का दावा किया था, जबकि दाताराम को ट्रायल के दौरान बतौर गवाह पेश नहीं किया गया। मृतक का शव अन्य सह-आरोपियों की निशानदेही पर मिला था, न कि रूबी की। अपील के निस्तारण में लंबा समय लगने की उम्मीद है। लिहाजा, कोर्ट ने रूबी की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए अपील लंबित रहने के दौरान उसे रिहा करने का आदेश दिया है।