अज्ञात में लिखाई गई थी एफआईआर
घटना के बाद अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाते हुए बताया कि उसके परिवार के लोग बिहार में एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए गए हुए थे। घर पर उसकी नबालिग बेटी अकेली उसके साथ रह रही थी। 30 दिसंबर 2020 को वह फैक्ट्री में ड्यूटी के लिए गया था। शाम को घर लौटा तो बेटी को मृत अवस्था में पाया। उसकी गर्दन पर एक शाल लिपटी हुई थी।
ऐसे खुला था राज...दुष्कर्म कर हत्या की इस हृदयविदारक घटना का खुलासा पुलिस विवेचना में हुआ था। जांच में सामने आया था कि पीड़िता का पिता और हत्यारा एक ही फैक्ट्री में साथ काम करते थे। दोनों में दोस्ती भी थी। हत्यारोपी को जानकारी मिली थी कि उसके सहकर्मी का परिवार शादी समारोह में शामिल होने बिहार गया है। घर पर नाबालिग बेटी अकेली है।
घटना वाले दिन जब उसका दोस्त गोविंद फैक्ट्री पहुंचा तो मौका देखकर वहां से छुट्टी लेकर पीड़िता के घर पहुंच गया। पीड़िता ने पिता के दोस्त को दरवाजे पर देखकर भीतर से कुंडी खोल दी। आरोपी ने भीतर घुसकर बालिका से दुष्कर्म किया और राज खुलने के डर से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। आरोपी अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचा तो वहां मौजूद पड़ोसियों ने इसकी पहचान उस आदमी के रूप में की, जिसे उन लोगो ने घटना वाले दिन पीड़िता के घर से निकलते देखा था। यहीं से राज खुला गया।
सुनाई गई उम्रकैद तो पहुंचा हाईकोर्ट
विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार जेल भेज दिया और उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। पड़ोसियों के बयानों के साथ ही आरोपी के कपड़ों की आई एफएसएल रिपोर्ट से भी दुष्कर्म की घटना साबित हुई तो मुजफ्फरनगर की पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने उसे नाबालिग की दुष्कर्म के बाद हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद और 18 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुना दी। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
चार जनवरी 2021 से जेल में बंद गोविंद के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची मामले में नामजद नही था, गलत विवेचना के आधार पर उसे झूठा फंसाया गया हैं। क्योंकि मृतका के पिता और वह एक ही फैक्ट्री में काम करने वाले है, इनके बीच वेतन को लेकर विवाद चल रहा था। अदालत ने मामले की निर्ममता और बेदम दलीलो के कारण जमानत अर्जी खारिज कर दी।