इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1995 में बुलंदशहर में हुई हत्या में दोषियों की अपील खारिज कर दी है। ट्रायल कोर्ट की ओर से 2006 में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए दोषियों की जमानत रद्द कर दी। महेंद्र, बांके और पप्पू उर्फ महिपाल को तत्काल हिरासत में लेकर शेष सजा काटने के लिए जेल भेजने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया।
यह मामला 24 अगस्त 1995 की शाम का है। थाना सियाना के ग्राम मकड़ी के निवासी फतेह सिंह की चुनावी सभा से लौटते समय आरोपियों ने तंमचों से उन पर हमला कर दिया। हादसे में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में अपीलकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को अपीलकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
आरोपियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि एफआईआर 5-6 घंटे की देरी से दर्ज कराई गई थी। मुख्य गवाह मृतक के करीबी रिश्तेदार हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल रिश्तेदारी के आधार पर गवाह को नकारा नहीं जा सकता। कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों में पूर्ण सामंजस्य पाते हुए माना कि मृतक के शरीर पर मिले गोली के निशान और चोटें अभियोजन की कहानी की पुष्टि करती हैं।