जिला अदालत ने सेना में कार्यरत युवक की पीट-पीटकर हत्या के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश सत्र न्यायाधीश सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने दिया। चाका नैनी निवासी आरोपी राजीव कुमार ठाकुर के खिलाफ करछना थाने में मृतक के पिता उमाकांत सिंह ने भीड़ द्वारा की गई हत्या (मॉब लिंचिंग) और दंगा फैलाने जैसे गंभीर मामले में मुकदमा दर्ज कराया था।
वादी उमाकांत सिंह ने आरोप लगाया है कि उनका 30 वर्षीय बेटा विवेक सिंह भारतीय सेना में था और अपने रिश्तेदार की शादी में शामिल होने घर आया था। 29 और 30 नवंबर 2025 की रात करीब दो बजे वह मित्र संग कार से घर लौट रहा था। इसी दौरान धरवारा मोड़ के पास स्कॉर्पियो में सवार लोगों ने उसकी गाड़ी रोक ली। आरोपी और उसके साथियों ने एकजुट होकर विवेक को कार से बाहर खींच लाए और लात-घूसों से पीटने लगे। इसके बाद लोहे की रॉड से उसके सिर पर वार किया गया। गंभीर रूप से घायल विवेक को पहले प्रयागराज के अस्पताल और बाद में लखनऊ के मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया। जहां एक दिसंबर 2025 को उसकी मौत हो गई।
बचाव पक्ष कि ओर से दलील दी गई कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। एफआईआर देर से दर्ज की गई है, साक्ष्य विरोधाभासी हैं। उसकी कोई स्पष्ट भूमिका नहीं है। यह भी कहा गया कि आरोपी भारतीय सेना में कार्यरत एक अनुशासित जवान है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वहीं, सरकारी वकील और वादी के निजी अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह प्रत्यक्षदर्शी घटना है और सभी आरोपी मिलकर हत्या में शामिल थे। मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला जानलेवा हमले में बदल गया। कोर्ट ने आरोपी राजीव कुमार ठाकुर की जमानत अर्जी खारिज कर दी।