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- फोटो : BBC
चिल्ड्रेन अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से शनिवार को निमोनिया पीड़ित एक बच्चे की मौत हो गई। सांस लेने में हो रही दिक्कत से बच्चा तड़पता रहा, लेकिन डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उसे ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया। सही इलाज न मिलने से12 घंटे से अधिक बच्चा तड़पा, पिता गिड़गिड़ता रहा फिर बच्चे की जान चली गई। माता-पिता और परिजनों के विलाप से अस्पताल परिसर में भीड़ जुट गई, लेकिन डॉक्टर फिर भी उसे देखने नहीं आए।
सरकारी अस्पतालों में शासन सभी सुविधाएं मुहैया करा रही है, लेकिन डॉक्टर उपचार करने में कोताही बरत रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (चिल्ड्रेन) में शनिवार को सामने आया। झूंसी के रहने वाले आशीष कुमार का करीब चार वर्षीय बेटा उज्ज्वल कुछ दिनों से बीमार था। शुक्रवार की रात उसकी हालत गंभीर हो गई। आशीष रात दो बजे बच्चे को चिल्ड्रेन अस्पताल अस्पताल ले गए। परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को निमोनिया है। उसे भर्ती कर लिया गया। परिजनों के मुताबिक बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत थी, लेकिन कई बार कहने के बाद भी डॉक्टरों और कर्मचारियों ने ऑक्सीजन लगाने से मना कर दिया।
शनिवार को मासूम उज्ज्वल ने तड़पकर दम तोड़ दिया। आशीष का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही की। यदि बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट दे दिया जाता तो उसकी जान बच जाती। इस बारे में अस्पताल की प्रभारी डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहाकि बच्चे के इलाज में लापरवाही के आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने इलाज संबंधी जानकारी के लिए डॉ. शाहिद से बात करने को कहा, लेकिन उनका मोबाइल बंद रहा।