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आजम खां की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग खारिज

Sun, 18 Dec 2016 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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आजम खान 2
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सपा सरकार के कबीना मंत्री आजम खां पर काला धन सफेद करने और तमाम दूसरे आरोपों की जांच स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने की मांग में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार करते हुए इसे खारिज कर दिया। याचिका रामपुर के कांग्रेस नेता और व्यवसायी फैसल खान लाला ने दाखिल की थी। याची ने खुद पर दर्ज मुकदमों की जांच भी पुलिस से हटाकर दूसरी एजेंसी से कराने की मांग की थी। याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रेखा दीक्षित की खंडपीठ ने सुनवाई की।
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याची के खिलाफ रामपुर में वर्ष 2010 से लेकर 2016 के बीच चार आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं। उस पर थाना सिविल लाइंस में पुलिस से मारपीट और बवाल करने का भी मुकदमा है। फैसल ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि सपा सरकार में मंत्री आजम खां ने उसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण फर्जी मुकदमों में फंसवाया है। याची जिला कांग्रेस का महासचिव है और कांग्रेस के टिकट पर रामपुर विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का दावेदार भी है। इस कारण आजम खां ने उस पर कई बार जानलेवा हमला करवाया। उस पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए। उसकी फैक्ट्रियों का लाइसेंस रद्द करा दिया तथा बिजली का बिल जमा होने के बावजूद फैक्ट्रियों की बिजली कटवा दी। पिछले लोक सभा चुनाव में आजम के  करीबियों ने उस पर जानलेवा हमला किया। उन्हीं के इशारे पर पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मारने की कोशिश भी की।

याची का आरोप है कि आजम खां ने नोटबंदी के बाद जौहर विश्वविद्यालय परिसर में स्थित जिला सहकारी बैंक से करोड़ों रुपये के पुराने नोट बदले हैं। इसकी शिकायत उसने राज्यपाल रामनाईक को पत्र भेज कर की है। याचिका में पत्र की प्रति भी संलग्न की गई थी। अपर महाधिवक्ता इमरानउल्लाह और विकास सहाय ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। याचिका पोषणीय नहीं है। उसका पुराना आपराधिक इतिहास है। एक मुकदमा 2010 में दर्ज हुआ, जब सपा की सरकार नहीं थी। कोर्ट ने याचिका पोषणीय नहीं पाते हुए खारिज कर दी।
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